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POCSO कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के 3 आरोपियों को 25-25 साल का सश्रम कारावास

समाज को कड़ा संदेश देते हुए, सक्ती की फास्ट ट्रैक (पॉक्सो) कोर्ट ने नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के एक जघन्य मामले में तीनों आरोपियों को 25-25 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश गंगा पटेल की अदालत ने इस फैसले को पीड़ितों को न्याय और समाज में सुरक्षा का भरोसा दिलाने वाला बताया।

क्या थी घटना?
घटना 2 सितंबर 2024 की है। पीड़िता ने डभरा थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि तीन आरोपी उसे जबरदस्ती वोटलाल माली के घर ले गए और सामूहिक दुष्कर्म किया।
दोषी आरोपी:
वोटलाल माली
गणेश उर्फ गणेशी माली
मदन सुंदर माली
भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत कार्रवाई
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की निम्नलिखित गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया था:
धारा 70(1): बलपूर्वक दुष्कर्म से संबंधित
धारा 127(2): सामूहिक दुष्कर्म
???? न्यायालय में निर्णायक साक्ष्य
न्यायालय में पीड़िता को न्याय दिलाने में जांच के दौरान जुटाए गए मजबूत साक्ष्य निर्णायक साबित हुए।
पीड़िता का बयान: न्यायालय में धारा 180 और 183(बी) के तहत दर्ज किया गया।
वैज्ञानिक साक्ष्य:
पीड़िता की विस्तृत चिकित्सीय जांच (Medical Examination)।
डीएनए परीक्षण (DNA Report)।
घटनास्थल से बरामद सामग्री का परीक्षण।
अपराध की स्वीकृति: पूछताछ के दौरान तीनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था।
कठोर सजा पर कोर्ट की टिप्पणी
फास्ट ट्रैक पॉक्सो कोर्ट की न्यायाधीश गंगा पटेल ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए कहा कि नाबालिगों के खिलाफ इस तरह के जघन्य अपराधों पर कड़ी सजा समाज में भय पैदा करती है और कानून पर पीड़ितों के भरोसे को मजबूत करती है।
सजा की अवधि: तीनों दोषियों (गणेश माली, मदन माली, वोटलाल माली) को 25 वर्ष का सश्रम कारावास।







