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रायगढ़ में कोयला खदान के विरोध में भड़की हिंसा: पुलिस पर पथराव और गाड़ियों में आगजनी, कई घायल...

Chhattisgarh RRT News Desk 05 January 2026

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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में कोयला खदान परियोजना के खिलाफ चल रहा आंदोलन शनिवार को हिंसक हो गया। गारे पेलमा सेक्टर-1 (Gare Pelma Sector-I) कोयला ब्लॉक के विरोध में पिछले 15 दिनों से धरने पर बैठे ग्रामीणों और पुलिस के बीच जबरदस्त झड़प हुई। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया और इलाके में तैनात सुरक्षा बलों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।

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घटना उस समय और गंभीर हो गई जब आक्रोशित भीड़ ने पुलिस के घेरे को तोड़कर जिंदल पावर लिमिटेड के कोल हैंडलिंग प्लांट (CHP) में प्रवेश कर लिया। प्रदर्शनकारियों ने वहां खड़ी कई गाड़ियों, ट्रैक्टरों और एक कन्वेयर बेल्ट को आग के हवाले कर दिया। इस हिंसा में तमनार थाना प्रभारी कमला पुसाम सहित लगभग 8 से 10 पुलिसकर्मी और कई ग्रामीण घायल हुए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में महिला पुलिस अधिकारी के साथ अभद्रता और मारपीट की तस्वीरें भी सामने आई हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि कोयला खदान के लिए की गई जनसुनवाई (Public Hearing) नियमों के विरुद्ध थी और प्रशासन उनकी जमीनों को जबरन अधिग्रहित करने की कोशिश कर रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे थे, लेकिन पुलिसिया कार्रवाई ने उन्हें उग्र होने पर मजबूर किया। वहीं, जिला प्रशासन का कहना है कि असामाजिक तत्वों ने भीड़ को उकसाया, जिसके बाद पत्थरबाजी और आगजनी की घटनाएं हुईं।

हिंसा की सूचना मिलते ही रायगढ़ एसपी और कलेक्टर भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। वर्तमान में पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है।

इस घटना पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर आदिवासियों और ग्रामीणों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, सरकार ने शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि विकास कार्यों में बाधा डालने और कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह विवाद अब छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास और स्थानीय अधिकारों के बीच एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है।

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