रायपुर को स्वच्छता के मामले में देश के अग्रणी शहरों में शुमार करने के लिए 'इंदौर मॉडल' को लागू करने की कवायद तेज हो गई है। रायपुर पश्चिम के विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री राजेश मूणत, महापौर श्रीमती मीनल चौबे और नगर निगम आयुक्त श्री विश्वदीप ने रविवार सुबह लगातार 5 घंटे फील्ड पर बिताए। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में हिदायत दी कि इंदौर जैसी स्वच्छता की स्थिति रायपुर में भी होनी चाहिए और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण का मुख्य केंद्र सरोना डंपिंग यार्ड रहा, जहाँ लगभग 80 प्रतिशत कचरा हटाने का काम पूरा हो चुका है। विधायक मूणत और महापौर ने निर्देश दिए कि शेष कार्य में तेजी लाई जाए और आसपास की खाली शासकीय भूमि का तत्काल सीमांकन कराया जाए। इस भूमि का उपयोग भविष्य में जनहित की ठोस योजनाओं के लिए किया जाएगा। साथ ही, सरोना शीतला माता मंदिर के समीप रिक्त भूमियों के लिए भी कार्ययोजना शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
शहर की जीवनदायिनी खारून नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए भी मास्टर प्लान तैयार किया गया है। विधायक और महापौर ने चंदनीडीह स्थित 75 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का बारीकी से निरीक्षण किया। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि शहर के चिंगरी और पीहर नाले का गंदा पानी किसी भी स्थिति में सीधे खारून नदी में न मिले। नालों की विशेष सफाई अभियान चलाकर पूरे सीवेज को एसटीपी तक पहुँचाने की योजना बनाई गई है।
इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू नगर निगम की आय से भी जुड़ा है। विधायक राजेश मूणत ने कहा कि एसटीपी में ट्रीटमेंट के बाद निकलने वाले 'रा वाटर' (Raw Water) को औद्योगिक समूहों को बेचा जाएगा। इससे खारून नदी भी साफ रहेगी और रायपुर नगर निगम के लिए आय का एक नया और स्थायी स्रोत भी विकसित होगा। यह मॉडल शहर के विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान जोन अध्यक्ष प्रीतम सिंह ठाकुर, पार्षद महेंद्र औसर और निगम के आला अधिकारी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों के इस कड़े रुख के बाद निगम अमला अब युद्ध स्तर पर काम में जुट गया है। प्रशासन की प्राथमिकता अब मानसून से पहले नालों के ओवरफ्लो की समस्या को खत्म करने और शहर के कचरा निस्तारण प्रणाली को पूरी तरह आधुनिक बनाने की है।








