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सरकारी हॉस्टलों में 'ईंधन संकट' की मार; मेस संचालकों ने खड़े किए हाथ, छात्रों को नसीब नहीं हो रही रोटी

Chhattisgarh RRT News Desk 12 March 2026

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रायपुर: राजधानी रायपुर के बड़े सरकारी शिक्षण संस्थानों और छात्रावासों (Hostels) में रहने वाले हजारों छात्रों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश में ईंधन (LPG) की कमी की अफवाहों के बीच मेस संचालकों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। मेस संचालकों ने छात्रों को दो टूक कह दिया है कि "गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए अब केवल चावल ही मिलेगा, रोटियां नहीं मिल पाएंगी।" इस स्थिति ने एनआईटी (NIT), आयुष यूनिवर्सिटी और अन्य बड़े संस्थानों के हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों की चिंता बढ़ा दी है।

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हालांकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन धरातल पर मेस संचालकों का दावा कुछ और ही है। संचालकों का कहना है कि गैस एजेंसियों से उन्हें व्यावसायिक सिलेंडर मिलने में दिक्कत आ रही है, जिसके कारण वे रोटियां बनाने के लिए जरूरी ईंधन का प्रबंधन नहीं कर पा रहे हैं। रोटी बनाने में चावल की तुलना में अधिक समय और गैस की खपत होती है, इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर छात्रों को केवल दाल-चावल पर निर्भर रहने को कहा जा रहा है।

छात्रों का कहना है कि वे पहले से ही परीक्षाओं और पढ़ाई के दबाव में हैं, और अब उचित आहार न मिलने से उनका स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है। कई छात्रावासों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी किया है, उनका कहना है कि प्रशासन और खाद्य विभाग को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि मेस संचालकों को गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। छात्र मांग कर रहे हैं कि जब सरकार कह रही है कि स्टॉक पर्याप्त है, तो फिर एजेंसियों में किल्लत क्यों दिखाई जा रही है?

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए कहा है कि वे प्रमुख संस्थानों के मेस संचालकों और गैस वितरकों के साथ समन्वय कर रहे हैं। प्रशासन ने मेस संचालकों को चेतावनी दी है कि वे अफवाहों के आधार पर छात्रों की डाइट में कटौती न करें। इस बीच, संस्थानों के वार्डन और प्रबंधन स्थिति को सामान्य बनाने के लिए वैकल्पिक ईंधन स्रोतों पर विचार कर रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सीएम की घोषणा के बाद भी यह 'कृत्रिम संकट' कब तक समाप्त होता है।

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