मुंबई। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने ग्राहकों को झटका देते हुए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में कटौती की घोषणा कर दी है। इस कटौती का सीधा असर बैंक की लोकप्रिय विशेष जमा योजना 'अमृत वृष्टि' (Amrit Vrishti) पर पड़ा है, जिसे ग्राहकों के बीच काफी पसंद किया जा रहा था। बैंक के इस कदम से उन निवेशकों की चिंता बढ़ गई है जो अपनी बचत को सुरक्षित रखने और नियमित आय के लिए एफडी पर निर्भर रहते हैं।
'अमृत वृष्टि' स्कीम की नई दर 6.45% हुई
बैंक द्वारा जारी की गई नई दरों के अनुसार, एसबीआई की विशेष एफडी स्कीम 'अमृत वृष्टि' पर अब जमाकर्ताओं को पहले के मुकाबले कम ब्याज मिलेगा। इस स्कीम के तहत सामान्य ग्राहकों को अब 6.45% की दर से ब्याज दिया जाएगा। हालांकि, वरिष्ठ नागरिकों को हमेशा की तरह 0.50% अधिक ब्याज मिलता रहेगा। यह कटौती उन जमाकर्ताओं के लिए निराशाजनक है जिन्होंने इस सीमित अवधि की विशेष योजना में उच्च रिटर्न की उम्मीद से निवेश किया था।
घटते रिटर्न से निवेशक चिंतित, अन्य बैंकों पर भी दबाव
एसबीआई का यह फैसला व्यापक बैंकिंग ट्रेंड को दर्शाता है, जहां सिस्टम में तरलता (लिक्विडिटी) बढ़ने के कारण बैंक जमा दरों में कमी कर रहे हैं। ब्याज दरों में आई यह गिरावट उन मध्यमवर्गीय और सेवानिवृत्त लोगों के लिए चिंता का विषय है जो अपनी मासिक आय और बचत के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले रिटर्न पर ही मुख्य रूप से निर्भर रहते हैं। यह कटौती यह संकेत भी देती है कि आने वाले समय में अन्य बैंक भी अपनी एफडी दरों को कम कर सकते हैं।
अन्य टेन्योर की दरों में भी हुआ संशोधन, तत्काल प्रभाव से लागू
'अमृत वृष्टि' स्कीम के अलावा, एसबीआई ने विभिन्न अवधियों (tenures) की अपनी अन्य नियमित फिक्स्ड डिपॉजिट योजनाओं की ब्याज दरों में भी संशोधन किया है। बैंक ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर नई दरें अधिसूचित कर दी हैं, और यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी निवेश से पहले एसबीआई की नवीनतम ब्याज दर सूची को ध्यान से जांच लें ताकि उन्हें अपनी जमा पर मिलने वाले वास्तविक रिटर्न की जानकारी हो सके।
एक्सपर्ट्स की सलाह: अन्य विकल्पों पर करें विचार
वित्तीय एक्सपर्ट्स का मानना है कि एफडी दरों में कमी के बाद निवेशकों को अब बेहतर रिटर्न पाने के लिए अन्य निवेश विकल्पों की ओर रुख करना चाहिए। इनमें डेट म्यूचुअल फंड्स, सरकारी बॉन्ड या अन्य सुरक्षित बचत योजनाओं को शामिल किया जा सकता है। एसबीआई का यह कदम संकेत देता है कि ब्याज दरों का उच्च स्तर अब खत्म हो रहा है, इसलिए ग्राहकों को अपनी निवेश रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।








