छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुआ हादसा अब एक बड़ी त्रासदी का रूप ले चुका है। बॉयलर फटने से शुरू हुई यह घटना लगातार और अधिक दर्दनाक होती जा रही है, जिसमें मरने वालों की संख्या अब 24 तक पहुँच गई है। इलाज के दौरान दम तोड़ने वाले हर मजदूर के साथ, प्रशासन और कंपनी प्रबंधन पर उठ रहे सवालों की गंभीरता और भी बढ़ गई है।
प्रशासन ने अब इस मामले में 'जीरो टॉलरेंस' अपनाते हुए उच्चस्तरीय जांच की प्रक्रिया को और तेज कर दिया है। दोषियों को सजा दिलाने और इस हादसे की तह तक जाने के लिए जांच समिति ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि यदि उनके पास इस घटना से जुड़ी कोई भी जानकारी, दस्तावेज, वीडियो या सबूत (साक्ष्य) हैं, तो वे 29 अप्रैल तक इसे आधिकारिक रूप से जमा कर सकते हैं।
इस हादसे में प्रबंधन की घोर लापरवाही के संकेत मिलने के बाद से ही हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस ने कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्लांट हेड समेत कई जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट में बॉयलर के फर्नेस में अत्यधिक ईंधन जमा होने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को इस विस्फोट का मुख्य कारण बताया गया है।
अब सबकी निगाहें 29 अप्रैल तक जमा होने वाले साक्ष्यों पर टिकी हैं। क्या यह साक्ष्य जांच को किसी निर्णायक मोड़ पर ले जाएंगे? और क्या इतनी बड़ी मौतों के बाद अब औद्योगिक सुरक्षा को लेकर कोई ठोस नीतिगत बदलाव होगा? यह त्रासदी न केवल एक औद्योगिक हादसा है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा 'प्रश्नचिह्न' है, जिसका जवाब पूरा छत्तीसगढ़ मांग रहा है।

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