Breaking
- Raipur Crime News: नहाते समय चार लड़कियों का अश्लील वीडियो बनाने वाले दो आरोप...
- Navratri Garba Mahotsav: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी के विभिन्न गरबा ए...
- Deputy CM Vijay Sharma Chaupal News: उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कबीरधाम के व...
- Chhattisgarh Agriculture Crop Protection News: किसानों की फसल सुरक्षा के लिए ...
- प्रतिभा बड़े शहरों की मोहताज नहीं, सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो सरगुजा का बच...
- Good Governance News: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में संवेदनशील शासन...
- बस के अंदर फांसी पर लटकी मिली कंडक्टर की लाश, मचा हड़कंप
- जय अंबे स्वीट्स, जनता स्वीट्स और स्वीट हार्ट सील, छापे में मिठाइयों में कीड़े...
- छत्तीसगढ़ में लापरवाह अधिकारियों को लेकर शासन गंभीर, PWD के 13 अधिकारियों को ...
- रायपुर में 53 लाख की चोरी का खुलासा, पुलिस ने दो को किया गिरफ्तार; गीजर और खि...
शिक्षा व्यवस्था बदहाल: 34 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे, पालकों का फूटा गुस्सा, कई स्कूलों में तालाबंदी

बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए करीब डेढ़ माह बीत चुका है, लेकिन जिले के कई स्कूल अब भी शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि 34 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

शिक्षकों की कमी को लेकर पालकों और ग्रामीणों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। जिले में अब तक चार स्कूलों में तालाबंदी की जा चुकी है, जबकि 24 जुलाई को मुल्ले गांव के स्कूल में भी तालाबंदी की चेतावनी दी गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद शिक्षा विभाग और शासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
शिक्षा विभाग के अनुसार जिले में सहायक शिक्षकों के लगभग 2400 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से करीब 1000 पद खाली हैं। सबसे अधिक असर प्राथमिक स्कूलों में देखने को मिल रहा है, जहां एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। इसके अलावा कई शिक्षक अटैचमेंट के कारण अपनी मूल शाला में सेवाएं नहीं दे पा रहे हैं, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने मांग की है कि रिक्त पदों पर जल्द से जल्द नियुक्तियां की जाएं और अटैचमेंट पर कार्यरत शिक्षकों को उनकी मूल शालाओं में वापस भेजा जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई नियमित रूप से हो सके।







