नारायणपुर/अबूझमाड़: छत्तीसगढ़ के घोर नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्र अबूझमाड़ के कोड़ेनार गांव ने आज एक नया इतिहास रचा है। देश की आजादी के दशकों बाद पहली बार इस गांव में औपचारिक रूप से स्कूल की घंटी गूंजी है। अब तक शिक्षा की मुख्यधारा से कटे इस क्षेत्र के बच्चों के लिए 'शिक्षा का अधिकार' महज एक कागजी शब्द था, लेकिन शासन-प्रशासन के कड़े प्रयासों और सुरक्षा बलों के सहयोग से यहाँ प्राथमिक शाला की शुरुआत की गई है। स्कूल के पहले दिन बच्चों के चेहरों पर जो मुस्कान दिखी, उसने बस्तर के बदलते स्वरूप की एक नई तस्वीर पेश की है।
कोड़ेनार जैसे सुदूर अंचल में स्कूल खोलना प्रशासन के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। घने जंगलों और नक्सली दहशत के बीच जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ समन्वय स्थापित कर इस विद्यालय को मूर्त रूप दिया है। अब यहाँ के नौनिहालों को पढ़ाई के लिए मीलों दूर नहीं जाना पड़ेगा और न ही वे शिक्षा से वंचित रहेंगे। स्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति के साथ-साथ बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन और शिक्षण सामग्री की भी व्यवस्था की गई है, जिससे ग्रामीणों में भारी उत्साह और संतोष देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे 'बस्तर में शांति और विकास की जीत' बताया है। शासन का लक्ष्य है कि अबूझमाड़ के हर उस गांव तक स्कूल और बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जाएं, जो अब तक उपेक्षित थे। कोड़ेनार में स्कूल खुलना केवल एक भवन का निर्माण नहीं है, बल्कि यह उस विचारधारा की जीत है जो बंदूक की जगह बच्चों के हाथों में कलम देखना चाहती है। इस पहल से आने वाले समय में क्षेत्र में साक्षरता दर बढ़ेगी और युवा पीढ़ी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकेगी।








