छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में साइबर ठगी और धोखाधड़ी का एक नया तरीका सामने आया है। यहाँ कुछ शातिर जालसाजों ने मोबाइल फोन की प्री-बुकिंग पर भारी छूट और निवेश पर मोटे मुनाफे का लालच देकर शहर के कई लोगों को लाखों रुपये का चूना लगाया है। ठगों ने लोगों को विश्वास दिलाया कि वे सीधे कंपनियों से कम कीमत पर मोबाइल दिलाएंगे और यदि वे दूसरों को जोड़ते हैं, तो उन्हें आकर्षक कमीशन भी मिलेगा।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, ठगों ने एक संगठित तरीके से गिरोह चलाकर स्थानीय लोगों से संपर्क किया। उन्होंने सोशल मीडिया और वर्ड-ऑफ-माउथ (मौखिक प्रचार) के जरिए प्रचार किया कि नए मॉडल के स्मार्टफोन बाजार मूल्य से 30 से 40 प्रतिशत कम कीमत पर उपलब्ध हैं। इस झांसे में आकर कई युवाओं और छोटे व्यापारियों ने बड़ी रकम निवेश कर दी। कुछ लोगों को शुरुआत में छोटा लाभ दिया गया ताकि उनका भरोसा जीता जा सके, जो कि पोंजी स्कीम का एक हिस्सा था।
धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब प्री-बुकिंग के महीनों बाद भी न तो लोगों को मोबाइल फोन मिले और न ही उनका निवेश किया गया पैसा वापस आया। जब पीड़ितों ने उन एजेंटों और संचालकों से संपर्क करने की कोशिश की, तो उनके कार्यालय बंद मिले और मोबाइल फोन भी बंद आने लगे। ठगी का अहसास होते ही पीड़ितों ने सरगुजा पुलिस और साइबर सेल में मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
पुलिस की प्राथमिक जांच में पता चला है कि यह गिरोह न केवल अंबिकापुर बल्कि आसपास के जिलों में भी सक्रिय हो सकता है। ठगों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाए थे, जिनमें ठगी की राशि ट्रांसफर कराई गई थी। सरगुजा पुलिस अब इन बैंक खातों के लेन-देन और मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति या संदिग्ध ऐप के जरिए मोबाइल बुकिंग के नाम पर पैसे न दें।
अंबिकापुर में इस तरह के 'डिस्काउंट स्कैम' से व्यापारियों और आम जनता में काफी रोष है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अक्सर अधिक मुनाफे और सस्ती डील के चक्कर में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर देते हैं। पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष टीम गठित की है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पीड़ितों से अपील की गई है कि वे अपनी शिकायतें और डिजिटल साक्ष्य साइबर सेल को उपलब्ध कराएं।








