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जगदलपुर में पीलिया का खौफ, पर सरकारी अस्पताल खाली; आड़ावाल में जड़ी-बूटी और झाड़-फूंक के लिए लगी लंबी कतारें

Chhattisgarh 25 May 2026 (28)

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RRT News- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में पीलिया (जॉन्डिस) के बढ़ते प्रकोप के बीच एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है, जहां स्वास्थ्य विभाग के दावों और जागरूकता अभियानों पर अंधविश्वास भारी पड़ता दिख रहा है। जगदलपुर और आसपास के इलाकों में पीलिया से पीड़ित मरीजों का भरोसा अब भी आधुनिक चिकित्सा और सरकारी अस्पतालों से ज्यादा झाड़-फूंक तथा पारंपरिक देसी उपचार पर बना हुआ है। हालात ये हैं कि जहां जगदलपुर के महारानी जिला अस्पताल में रोजाना महज एक या दो पीलिया मरीज ही इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, वहीं शहर से ठीक लगे आड़ावाल क्षेत्र में देसी जड़ी-बूटी और झाड़-फूंक से इलाज का दावा करने वाले केंद्रों में लोगों की भारी भीड़ और लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

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महारानी अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों के मुताबिक, इस बीमारी के फैलने की सबसे मुख्य वजह दूषित और संक्रमित पानी का सेवन है। इस स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम शहर के उन संवेदनशील इलाकों को चिन्हित कर रही है जहां पेयजल की पाइपलाइनें नालियों से होकर गुजर रही हैं और पानी दूषित हो रहा है। नगर निगम प्रशासन ने भी कई वार्डों से दूषित पानी की शिकायतें मिलने की बात स्वीकार की है और प्रभावित क्षेत्रों, जैसे दलपत सागर के पास, टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल की सप्लाई शुरू की है। साथ ही पाइपलाइनों को दुरुस्त करने का काम भी युद्धस्तर पर जारी होने का दावा किया गया है।

इस प्रशासनिक कवायद के बीच सबसे बड़ी चुनौती लोगों की इस घातक बीमारी को लेकर बनी पुरानी रूढ़िवादी सोच है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि पीलिया का समय पर सही डॉक्टरी इलाज न होने और झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ने से मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है, जो लीवर फेलियर या जान जाने का कारण भी बन सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सिविल सर्जन और स्वास्थ्य अधिकारियों ने आम जनता से पुरजोर अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के अंधविश्वास या नीम-हकीमों के बहकावे में न आएं। पीलिया के लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर खून की जांच कराएं और डॉक्टरों की देखरेख में ही मुकम्मल इलाज शुरू करें।

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