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यूपी सरकार का बड़ा फैसला — अब राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय खेल कैंप व ट्रेनिंग “सरकारी ड्यूटी” मानी जाएगी
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लखनऊ :

उत्तर प्रदेश सरकार ने खिलाड़ियों के हित में एक बड़ा, ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला निर्णय लिया है। अब राज्य सरकार के किसी भी विभाग में पदस्थ खिलाड़ी जब राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं, ट्रेनिंग कैंप, कोचिंग सत्र या स्पोर्ट्स प्रैक्टिस के लिए जाते हैं, तो इस पूरी प्रक्रिया को सरकारी ड्यूटी के रूप में माना जाएगा।
सरकार के इस फैसले के अनुसार—
- राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर
- प्रतियोगिताओं में भागीदारी
- सेलेक्शन ट्रायल
- यात्रा का समय (ट्रैवल टाइम)
इन सभी को अब कर्मचारी-खिलाड़ियों की आधिकारिक ड्यूटी माना जाएगा।
खिलाड़ियों को क्या लाभ मिलेगा?
इस आदेश के लागू होते ही खिलाड़ियों को कई प्रशासनिक परेशानियों से छुटकारा मिलेगा, जैसे—
- छुट्टियों की बार-बार अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी
- अनुपस्थिति दर्ज नहीं होगी
- वेतन व भत्तों में कटौती का डर खत्म
- ट्रैवल टाइम भी ड्यूटी में शामिल होगा
- खेल संबंधी सरकारी अनुमतियाँ स्वतः स्वीकृत मानी जाएँगी
राज्य सरकार का कहना है कि खेल नीति में यह संशोधन इसलिए किया गया है ताकि सरकारी विभागों में कार्यरत खिलाड़ी बिना मानसिक दबाव के अपने प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में शामिल हो सकें। इससे खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहतर होगा और वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर राज्य और देश का नाम और ऊँचा कर सकेंगे।
खिलाड़ियों और खेल संगठनों की प्रतिक्रिया
खेल जगत ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है। खिलाड़ियों ने कहा कि यह निर्णय उनके लिए एक बड़ी राहत है। कई वर्षों से खिलाड़ी यह मांग कर रहे थे कि खेल संबंधी गतिविधियों को ड्यूटी का दर्जा मिले, जिससे उन्हें छुट्टियों और वेतन कटौती जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
राज्य के विभिन्न खेल संघों ने भी कहा कि यह फैसला यूपी में खिलाड़ियों के मनोबल को बढ़ाएगा और राज्य में खेलों के विकास को नई दिशा देगा।
RRT NEWS की रिपोर्ट
दिल्ली, हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों की तर्ज पर अब उत्तर प्रदेश ने भी खिलाड़ियों के लिए यह बड़ा कदम उठाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय आने वाले समय में खिलाड़ियों के प्रदर्शन और खेल संस्कृति दोनों को मजबूत करेगा।







