बिलासपुर: न्यायधानी बिलासपुर में प्रशासनिक भ्रष्टाचार और घूसखोरी के गंभीर आरोपों के बाद सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के बाहर जमकर हंगामा हुआ। घटना उस वक्त तूल पकड़ गई जब एक आरोपी के परिजनों ने कार्यालय के कर्मचारियों पर खुलेआम रिश्वत मांगने का आरोप लगाया। परिजनों का दावा है कि उनके केस को रफा-दफा करने या जमानत देने के बदले मोटी रकम की मांग की गई थी और जब उन्होंने पैसे देने से इनकार कर दिया, तो उनके आदमी को बिना किसी ठोस आधार के जेल भेज दिया गया। इस हंगामे के चलते काफी देर तक कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि सिटी मजिस्ट्रेट ऑफिस में बिना "सुविधा शुल्क" के कोई काम नहीं होता और आम जनता को परेशान करना यहाँ की दिनचर्या बन गई है। हंगामे की सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस टीम मौके पर पहुँची। लोगों का आक्रोश देख अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन गुस्साए परिजनों ने साक्ष्यों के साथ शिकायत करने की बात कही है। यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है और स्थानीय वकीलों व सामाजिक संगठनों ने भी इस पर नाराजगी जाहिर की है।
इस घटना ने बिलासपुर के प्रशासनिक कामकाज की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भ्रष्टाचार के इन आरोपों के बाद विपक्षी दलों और जागरूक नागरिकों ने कड़े एक्शन की मांग की है। कलेक्टर ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए विभाग को आंतरिक जांच के निर्देश दिए हैं। यदि ये आरोप सच साबित होते हैं, तो कई कर्मचारियों पर गाज गिरना तय है। फिलहाल, पुलिस मामले को शांत कराकर कानून व्यवस्था बहाल करने में जुटी है, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में इस "रिश्वतकांड" की चर्चा हर तरफ हो रही है।








