छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस ने धार्मिक धर्मांतरण की कोशिशों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। जिले के चकरभाठा थाना क्षेत्र के अंतर्गत प्रार्थना सभा की आड़ में लोगों को कथित तौर पर ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के आरोप में एक पास्टर और छह अन्य सहयोगियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। पुलिस ने यह कार्रवाई हिंदू संगठनों की शिकायत और मौके पर मिली संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर की है।
शिकायत के अनुसार, क्षेत्र के एक निजी परिसर में लंबे समय से 'चंगाई सभा' और प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया जा रहा था। आरोप है कि इन सभाओं में गरीब और भोले-भाले ग्रामीणों को बीमारी दूर करने और आर्थिक लाभ का झांसा देकर बुलाया जाता था। वहां मौजूद लोगों को हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ भड़काने और ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। स्थानीय लोगों ने जब इसका विरोध किया, तो मामला पुलिस तक पहुँचा।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों द्वारा चंगाई के नाम पर अंधविश्वास फैलाया जा रहा था। मौके पर मौजूद कई लोगों ने बताया कि उन्हें विशेष प्रार्थना के जरिए असाध्य रोगों से मुक्ति दिलाने का वादा किया गया था। पुलिस ने कार्यक्रम स्थल से कुछ प्रचार सामग्री और अन्य संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद किए हैं, जिनका उपयोग धर्मांतरण के लिए किए जाने का संदेह है।
इस मामले में पुलिस ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम (Anti-Conversion Law) के तहत मामला दर्ज किया है। FIR में नामजद आरोपियों में मुख्य पास्टर के अलावा वे लोग भी शामिल हैं जो सभा के आयोजन और भीड़ जुटाने का काम कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि इस आयोजन के लिए विदेशों से या किसी विशेष संस्था से फंडिंग तो नहीं मिल रही थी।
क्षेत्र में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। हिंदू संगठनों ने मांग की है कि ऐसे अवैध आयोजनों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए। वहीं, पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के प्रलोभन या झांसे में न आएं और ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी थाने में दें। मामले की विस्तृत विवेचना जारी है।








