CG NEWS : न्यायधानी की रामसर साइट घोषित कोपरा जलाशय इन दिनों प्रकृति और पक्षी प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। सर्दियों के मौसम में देश-विदेश से हजारों किलोमीटर की यात्रा कर ग्रेलैंग हंस इस जलाशय में डेरा डाल रहे हैं।
पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, ये हंस आइसलैंड, स्कैंडिनेविया और रूस जैसे ठंडे देशों से आते हैं और हिमालय की ऊँचाई पार कर 5 से 7 हजार किलोमीटर की लंबी उड़ान पूरी कर जलाशय तक पहुँचते हैं। प्रवास के दौरान ये 26 हजार फीट तक की ऊँचाई तक उड़ सकते हैं।
कोपरा जलाशय में प्रवासी हंस आमतौर पर 10-15 दिन ठहरते हैं। वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर शिरीष हामरे कहते हैं, इतनी ऊँचाई पर लंबी उड़ान भरना इनके मजबूत पंखों और दिशा-ज्ञान का प्रमाण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशय में प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति इसकी स्वच्छता और जैव विविधता को दर्शाती है। सुबह और शाम के समय जलाशय में हंसों की चहचहाहट और उड़ान का दृश्य पर्यटकों और पक्षी प्रेमियों के लिए मनमोहक अनुभव प्रस्तुत करता है।
कोपरा जलाशय धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्तर का बर्ड वॉचिंग स्थल बनता जा रहा है और आने वाले वर्षों में यह पक्षी पर्यटन के लिए प्रमुख स्थल बन सकता है।








