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EXCLUSIVE: छत्तीसगढ़ में खनिज माफिया पर 'डिजिटल' स्ट्राइक; ड्रोन से होगी खदानों की 24×7 निगरानी, अवैध उत्खनन पर लगेगा ब्रेक...

Chhattisgarh RRT News Desk 24 January 2026

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में रेत, पत्थर और अन्य गौण खनिजों के अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए साय सरकार ने तकनीक का सहारा लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर खनिज साधन विभाग ने खदानों की निगरानी के लिए एक 'हाई-टेक' रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत अब राज्य के उन क्षेत्रों में जहाँ अवैध उत्खनन की शिकायतें सबसे ज्यादा आती हैं, वहां ड्रोन सर्विलांस तैनात किया जाएगा। यह सिस्टम न केवल उत्खनन पर नजर रखेगा, बल्कि स्टॉक और परिवहन की भी पल-पल की जानकारी प्रशासन को देगा।

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ड्रोन निगरानी की 3 बड़ी खूबियाँ:

वॉल्यूमेट्रिक एनालिसिस (Volumetric Analysis): ड्रोन तकनीक के जरिए खदान की गहराई और लंबाई-चौड़ाई का सटीक मापन किया जाएगा। इससे यह तुरंत पता चल जाएगा कि आवंटित पट्टे से ज्यादा खुदाई तो नहीं की गई है।

नाइट विजन और थर्मल कैमरे: रात के अंधेरे में होने वाले अवैध उत्खनन को पकड़ने के लिए इन ड्रोन में हाई-रेजोल्यूशन नाइट विजन कैमरे लगे होंगे, जो घने जंगलों या नदी के किनारों पर भी स्पष्ट फुटेज देंगे।

रियल-टाइम अलर्ट: जैसे ही कोई संदिग्ध गतिविधि या तय सीमा से बाहर मशीनें दिखाई देंगी, विभाग के कंट्रोल रूम को ऑटोमैटिक अलर्ट मिल जाएगा, जिससे फ्लाइंग स्क्वॉड तुरंत कार्रवाई कर सकेगा।

'राज्य खनिज अन्वेषण न्यास' का गठन

सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए 'राज्य खनिज अन्वेषण न्यास' (State Mineral Exploration Trust) का गठन किया है।

अध्यक्ष: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इसके अध्यक्ष हैं।

फंडिंग: गौण खनिजों से मिलने वाली रॉयल्टी का 2% हिस्सा इस न्यास को मिलेगा, जिसका उपयोग ड्रोन सर्विलांस और नई तकनीकी खोजों में किया जाएगा।

राजस्व में वृद्धि: अनुमान है कि इस तकनीक से अवैध उत्खनन रुकने पर सरकार के खजाने में सालाना 100 से 150 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जमा होगा।

इन क्षेत्रों पर रहेगी विशेष नजर

प्रारंभिक चरण में रायपुर, दुर्ग, धमतरी, महासमुंद और रायगढ़ जैसे जिलों के रेत घाटों और पत्थर खदानों को इस नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। विशेष रूप से महानदी और शिवनाथ नदी के किनारों पर ड्रोन की गश्त बढ़ाई जाएगी, जहाँ अवैध रेत उत्खनन की शिकायतें सबसे अधिक रहती हैं।

अधिकारियों की जवाबदेही तय

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि तकनीक के इस्तेमाल के बाद भी यदि किसी क्षेत्र में अवैध उत्खनन पाया जाता है, तो इसके लिए संबंधित जिले के खनिज अधिकारी (MO) और कलेक्टर सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। 'ड्रोन डेटा' को डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा, जिसे साक्ष्य के तौर पर कोर्ट में भी पेश किया जा सकेगा।

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