Raipur: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जेलों में कैदियों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल के भीतर राज्य की विभिन्न जेलों में कुल 66 कैदियों की मृत्यु हुई है। इन आंकड़ों के सार्वजनिक होते ही सदन में माहौल गरमा गया और विपक्ष ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
सदन में हंगामे की मुख्य वजह एक प्रमुख आदिवासी नेता की जेल में हुई संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु रही। विपक्षी विधायकों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि जेलों में कैदियों को न तो उचित चिकित्सा सुविधा मिल रही है और न ही उनके मानवाधिकारों का सम्मान हो रहा है। हंगामे के दौरान विपक्षी सदस्यों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए संबंधित विभाग के मंत्री ने बताया कि जेलों में होने वाली अधिकांश मौतें बीमारी या प्राकृतिक कारणों से हुई हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि हर मामले की न्यायिक जांच के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। हालांकि, आदिवासी नेता की मौत के विशिष्ट मामले में विपक्ष सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा और सदन की कार्यवाही में कई बार व्यवधान उत्पन्न हुआ।
यह मुद्दा छत्तीसगढ़ की जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों और बुनियादी सुविधाओं की कमी की ओर भी इशारा करता है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में कैदियों की मौत जेल सुधारों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है। फिलहाल, विधानसभा में इस मुद्दे पर तीखी बहस जारी है और सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का आश्वासन दिया है।








