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छत्तीसगढ़ में गहराता रोजगार संकट: 15 लाख से अधिक युवा बेरोजगार, जानें क्या हैं प्रमुख कारण

रायपुर (मार्च 2026): छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी के आंकड़े चिंताजनक स्तर पर पहुँच गए हैं। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 15 लाख को पार कर गई है, और हर महीने औसतन 17,000 नए युवा रोजगार कार्यालयों में अपना नाम दर्ज करा रहे हैं।

बेरोजगारी बढ़ने के 5 मुख्य कारण
भर्ती परीक्षाओं में देरी और गड़बड़ी: राज्य में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं (CGPSC और Vyapam) में होने वाली देरी, अदालती मामले और परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी सबसे बड़ा कारण है। हाल ही में सरकार ने भर्ती बोर्ड में सुधार के प्रस्ताव रखे हैं, लेकिन इस संक्रमण काल (Transition) में कई पुरानी भर्तियां अटकी हुई हैं।
प्राइवेट सेक्टर में कम वेतन और अनिश्चितता: रायपुर में आयोजित हालिया 'राज्य स्तरीय रोजगार मेले' में देखा गया कि 64,000 पंजीकृत युवाओं में से केवल 1,800 को ही ऑफर लेटर मिले। युवाओं का कहना है कि निजी कंपनियाँ बहुत कम वेतन (Market Rate से नीचे) और बाहरी राज्यों में पोस्टिंग की शर्तें रख रही हैं, जिसे स्वीकार करना उनके लिए मुश्किल है।
औद्योगिक नीति की चुनौतियां: विपक्ष (कांग्रेस) और विशेषज्ञों का आरोप है कि राज्य की औद्योगिक नीति नए रोजगार सृजित करने में पूरी तरह सफल नहीं रही है। उद्योगों को मिलने वाली रियायतों के बावजूद स्थानीय युवाओं को 'स्किल्ड जॉब्स' में प्राथमिकता नहीं मिल पा रही है।
कौशल और बाजार की मांग में अंतर (Skill Gap): डिग्रीधारी युवाओं की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन उद्योगों को जिस तरह के तकनीकी कौशल (Technical Skills) की जरूरत है, उसमें कमी देखी जा रही है। यही कारण है कि पोस्ट-ग्रेजुएट महिलाओं में बेरोजगारी दर 22.5% तक पहुँच गई है।
बजटीय सीमाएं और सरकारी रिक्तियां: हालांकि सरकार ने हाल ही में 5,000 शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की है, लेकिन लाखों रिक्त पदों के मुकाबले यह संख्या बहुत कम है। बजट में राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित करने के दबाव के कारण नई नियुक्तियों की रफ्तार धीमी है।
सरकार का पक्ष और समाधान की कोशिशें
शिक्षक भर्ती: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 5,000 शिक्षकों की तत्काल भर्ती के निर्देश दिए हैं और आने वाले समय में इसे 30,000 तक ले जाने का लक्ष्य है।
सख्त कानून: पेपर लीक और भर्ती में गड़बड़ी रोकने के लिए 1 करोड़ रुपये के जुर्माने वाला नया कानून लाया गया है ताकि युवाओं का भरोसा बहाल हो सके।
कौशल विकास: स्किल इंडिया मिशन के तहत युवाओं को इंडस्ट्री के लिए तैयार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।







