छत्तीसगढ़ में जनवरी के आखिरी हफ्ते में मौसम एक बार फिर करवट ले रहा है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर भारत में सक्रिय हुए एक नए और तीव्र पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का असर अब छत्तीसगढ़ के मैदानी और वनांचल क्षेत्रों में दिखने लगा है। इसके प्रभाव से हवाओं की दिशा बदली है, जिससे प्रदेश के कई हिस्सों में बादलों का डेरा डल गया है और हल्की बूंदाबांदी की संभावना बन गई है।
विक्षोभ की सक्रियता के कारण न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राजधानी रायपुर समेत दुर्ग और बिलासपुर संभाग में रात की ठंड में थोड़ी कमी आई है, लेकिन हवा में नमी बढ़ने से सुबह के समय हल्की उमस और धुंध का अहसास हो रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जब तक बादल रहेंगे, रात का पारा सामान्य से ऊपर बना रहेगा, लेकिन बादल छंटते ही कड़ाके की ठंड की वापसी होगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सरगुजा और पेंड्रारोड जैसे उत्तरी हिस्सों में पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव सबसे अधिक रहेगा। 28 जनवरी के आसपास कोरिया, सूरजपुर और बलरामपुर के कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि (Hailstorm) भी हो सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे कटी हुई फसलों और खुले में रखे अनाज को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दें।
मैदानी इलाकों में जहां बादल छाए हैं, वहीं बस्तर के अंदरूनी इलाकों और कवर्धा की चिल्फी घाटी में घना कोहरा देखा जा रहा है। विजिबिलिटी (दृश्यता) कम होने के कारण नेशनल हाईवे पर वाहनों की रफ्तार थम गई है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी करते हुए वाहन चालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि 30 जनवरी के बाद जैसे ही पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होगा, उत्तर से आने वाली बर्फीली हवाएं फिर से सक्रिय होंगी। इससे फरवरी के पहले हफ्ते में तापमान में अचानक 4 से 5 डिग्री की गिरावट आ सकती है, जिससे प्रदेश में एक बार फिर कड़ाके की ठंड (Cold Wave) का दौर शुरू होगा। फिलहाल, बादलों की आवाजाही के बीच मौसम का मिजाज मिलाजुला बना रहेगा।








