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Cyber Fraud: सावधान! सिर्फ एक लिंक और आपका बैंक अकाउंट हो सकता है साफ, जानें कैसे काम करता है स्क्रीन-शेयरिंग स्कैम

Cyber Fraud: आज के डिजिटल दौर में साइबर अपराधी ठगी के नए-नए और खौफनाक तरीके अपना रहे हैं, जिनमें 'स्क्रीन-शेयरिंग स्कैम' सबसे घातक साबित हो रहा है। इस खेल की शुरुआत एक साधारण फोन कॉल से होती है, जिसमें जालसाज खुद को बैंक अधिकारी, बिजली विभाग का कर्मचारी या टेक सपोर्ट बताकर आपसे संपर्क करते हैं। वे आपको झांसा देते हैं कि केवल 100 रुपये जैसी छोटी राशि जमा करके आप अपना बिजली कनेक्शन कटने से बचा सकते हैं या अपना KYC अपडेट कर सकते हैं। भरोसा जीतने के लिए तुरंत आपके व्हाट्सएप या एसएमएस पर एक लिंक भेजा जाता है। जैसे ही आप उस लिंक पर क्लिक कर अपनी बैंकिंग डिटेल डालते हैं, आपको लगता है कि सब कुछ सामान्य है, लेकिन असल में आप उनके बिछाए जाल में फंस चुके होते हैं।

इस स्कैम की सबसे खतरनाक कड़ी 10-15 मिनट बाद शुरू होती है, जब आपके फोन पर भुगतान की रसीद के बजाय बैंक से पैसे कटने के अलर्ट आने लगते हैं। देखते ही देखते खाते से लाखों रुपये साफ हो जाते हैं और जब तक आप संभलते हैं, वह लिंक भी गायब हो चुका होता है। साल 2022 के बाद से यह ट्रेंड तेजी से बढ़ा है, जिसमें खासकर बुजुर्गों को निशाना बनाया जा रहा है। अपराधी डर और जल्दबाजी का माहौल पैदा करते हैं, जैसे— "अभी रिचार्ज नहीं किया तो सिम बंद हो जाएगी" या "बिजली कट जाएगी"। घबराहट में यूजर उनकी बातों में आकर रिमोट एक्सेस या स्क्रीन-शेयरिंग ऐप इंस्टॉल कर लेता है, जिससे अपराधी को आपके फोन का पूरा कंट्रोल मिल जाता है।
साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मोबाइल पर स्क्रीन शेयर करना अपनी तिजोरी की चाबी चोर को सौंपने जैसा है। इस तकनीक के जरिए ठग आपके फोन पर आने वाले OTP, बैंक अलर्ट और निजी नोटिफिकेशन को रीयल-टाइम में देख सकते हैं। कई बार तो वे स्क्रीन को इस तरह मैनिपुलेट करते हैं कि आप खुद ही अनजाने में ट्रांजैक्शन को अप्रूव कर देते हैं। यह तरीका पारंपरिक फिशिंग से कहीं ज्यादा एडवांस है क्योंकि इसमें अपराधी को आपसे OTP पूछने की जरूरत ही नहीं पड़ती; वह आपकी स्क्रीन पर इसे खुद देख लेता है। यह तकनीक और मनोविज्ञान का एक ऐसा जानलेवा मेल है जिसमें पीड़ित को सोचने तक का मौका नहीं दिया जाता।
इस डिजिटल लूट से बचने का एकमात्र तरीका सावधानी और जागरूकता है। हमेशा याद रखें कि सरकारी विभाग या बैंक कभी भी 10 अंकों के साधारण मोबाइल नंबर से आधिकारिक मैसेज नहीं भेजते; उनके मैसेज हमेशा एक विशिष्ट आईडी (जैसे- AD-BANK) से आते हैं। अगर कोई भी अनजान व्यक्ति आपसे कोई ऐप डाउनलोड करने या स्क्रीन शेयर करने को कहे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और न ही किसी के दबाव में आकर जल्दबाजी में भुगतान करें। आपकी एक छोटी सी सावधानी आपकी जीवनभर की कमाई को सुरक्षित रख सकती है।







