छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में माओवादी विचारधारा को बड़ा झटका लगा है। खूंखार माओवादी नेता देवजी के आत्मसमर्पण के बाद अब संगठन में बिखराव की स्थिति साफ देखी जा रही है। वर्षों तक हिंसा का रास्ता अख्तियार करने वाले देवजी के मुख्यधारा में लौटने के फैसले ने संगठन के जमीनी कैडरों के मनोबल को पूरी तरह तोड़ दिया है, जिसके परिणामस्वरूप अब बड़ी संख्या में नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़ने का मन बना रहे हैं।
सुरक्षा बलों और खुफिया विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, देवजी के समर्पण के बाद नक्सलियों के आंतरिक संचार और रसद आपूर्ति में भारी बाधा आई है। संगठन के भीतर अब अविश्वास का माहौल है, क्योंकि देवजी जैसे वरिष्ठ कैडर का जाना यह दर्शाता है कि माओवादी विचारधारा अब अपने अंत की ओर है। पुलिस प्रशासन की 'पुनर्वास नीति' और विकास कार्यों ने भी इन भटके हुए युवाओं को हथियार डालने के लिए प्रेरित किया है।
पिछले कुछ हफ्तों में, बस्तर के विभिन्न जिलों से छोटे और मध्यम स्तर के कैडरों ने पुलिस के सामने सरेंडर किया है। इन आत्मसमर्पित नक्सलियों का कहना है कि वे संगठन के खोखले वादों और जंगलों में असुरक्षित जीवन से तंग आ चुके थे। देवजी के समर्पण ने उन्हें यह विश्वास दिलाया है कि शासन की शरण में आने पर उन्हें न केवल सुरक्षा मिलेगी, बल्कि एक सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी प्राप्त होगा।
बस्तर आईजी और स्थानीय पुलिस अधीक्षकों ने इस बदलाव का स्वागत किया है। पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े चेहरे सरेंडर कर सकते हैं। सरकार की स्पष्ट रणनीति और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव ने माओवादियों को रक्षात्मक मोड में डाल दिया है। 'बस्तर अब बदलेगा' के संकल्प के साथ प्रशासन इन आत्मसमर्पित माओवादियों के कौशल विकास और रोजगार पर विशेष ध्यान दे रहा है ताकि वे समाज की मुख्यधारा का हिस्सा बन सकें।








