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विश्लेषण: राजनीति में युवाओं की भागीदारी क्यों है समय की मांग? 'विकसित भारत' के निर्माण में नई पीढ़ी का रोल

रायपुर। भारत दुनिया का सबसे युवा देश है, जहाँ 65 प्रतिशत से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। ऐसे में देश की दिशा और दशा तय करने वाली 'राजनीति' में युवाओं का होना केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए अनिवार्य हो गया है। हाल ही में संपन्न हुए 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026' ने एक बार फिर इस बहस को छेड़ दिया है कि क्या अब अनुभवी चेहरों के साथ-साथ ऊर्जावान युवाओं को नेतृत्व की बागडोर सौंपने का सही समय आ गया है?

1. आधुनिक समस्याओं का आधुनिक समाधान
आज की राजनीति केवल सड़क, बिजली और पानी तक सीमित नहीं है। आज के मुद्दे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा प्राइवेसी, क्लाइमेट चेंज और स्टार्टअप इकोनॉमी से जुड़े हैं। युवाओं के पास इन विषयों की गहरी समझ और तकनीक के साथ तालमेल बिठाने की क्षमता है। जब नीति-निर्माण (Policy Making) में युवा शामिल होते हैं, तो वे भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक व्यावहारिक और नवाचारी समाधान पेश करते हैं।
2. 'एक लाख युवा' और राजनीति का लोकतंत्रीकरण
वर्ष 2026 की शुरुआत में सरकार ने राजनीति में उन एक लाख युवाओं को लाने का लक्ष्य रखा है, जिनकी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है।
वंशवाद पर प्रहार: गैर-राजनीतिक परिवारों से युवाओं का आना राजनीति में 'वंशवाद' की जड़ों को कमजोर करता है।
फ्रेश आइडियाज: नए लोग नई ऊर्जा और बिना किसी पूर्वाग्रह के व्यवस्था में सुधार के लिए काम करते हैं।
3. लोकतंत्र में व्यापक प्रतिनिधित्व
यदि 65% आबादी युवा है, तो संसद और विधानसभाओं में उनका प्रतिनिधित्व (Representation) भी उसी अनुपात में होना चाहिए। युवाओं की भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि देश की सबसे बड़ी आबादी की आवाज सीधे सदन तक पहुँचे। इससे लोकतंत्र अधिक समावेशी और जवाबदेह बनता है।
4. भ्रष्टाचार और जड़ता को चुनौती
अक्सर राजनीति को एक 'गंदा खेल' मानकर शिक्षित युवा इससे दूरी बना लेते हैं। लेकिन युवाओं की बढ़ती सक्रियता ने इस धारणा को बदला है। युवा अब केवल 'वोटर' नहीं, बल्कि 'चेंज मेकर' बनना चाहते हैं। पारदर्शिता, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' युवाओं के प्रमुख गुण हैं, जो प्रशासनिक मशीनरी में नई जान फूंक सकते हैं।
5. ग्लोबल लीडरशिप की तैयारी
दुनिया भर में फिनलैंड से लेकर कनाडा तक, युवा नेतृत्व ने अपनी छाप छोड़ी है। भारत को 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ऐसे लीडर्स की जरूरत है, जो वैश्विक मंच पर भारत का मजबूती से प्रतिनिधित्व कर सकें। युवाओं की भागीदारी उन्हें अभी से जमीनी स्तर (Panchayat to Parliament) पर तैयार होने का मौका देती है।
युवाओं के लिए राजनीति में आने के अवसर (2026):
MY Bharat पोर्टल: युवाओं को विभिन्न नेतृत्व कार्यक्रमों से जोड़ना।
युवा संसद (Youth Parliament): संसदीय प्रक्रियाओं को समझने के लिए जिला और राज्य स्तर पर मंच।
डिजिटल प्लेटफॉर्म: सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी राजनीतिक विचारधारा और मुद्दों को जनता तक पहुँचाना।
निष्कर्ष:
राजनीति में युवाओं का आना केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की गारंटी है। जैसा कि 2026 के राजनीतिक परिदृश्य में देखा जा रहा है, अब समय 'अनुभव' और 'ऊर्जा' के सही संतुलन का है। जब देश का युवा खुद कानून बनाने की प्रक्रिया में शामिल होगा, तभी 'नया भारत' का सपना साकार होगा।







