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जल जीवन मिशन: छत्तीसगढ़ के गांवों में दूर हुई पानी की किल्लत; 'हर घर नल-जल' से महिलाओं के जीवन में आया बदलाव

Chhattisgarh RRT News Desk 30 December 2025

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छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के तहत 'हर घर नल से जल' पहुंचाने का अभियान अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। राज्य के सुदूर वनांचलों से लेकर मैदानी इलाकों तक, हजारों ग्रामीण परिवारों का अपने घर के आंगन में साफ पानी पाने का सपना साकार हो रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के माध्यम से चलाई जा रही इस योजना ने न केवल पानी की समस्या को खत्म किया है, बल्कि ग्रामीण जीवन स्तर में भी व्यापक सुधार किया है।

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इस मिशन का सबसे सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण महिलाओं के जीवन पर पड़ा है। पहले जिन महिलाओं को पीने के पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी या घंटों हैंडपंप पर कतार में लगना पड़ता था, उन्हें अब घर पर ही शुद्ध पेयजल मिल रहा है। इससे उनके समय और श्रम की बचत हो रही है, जिसका उपयोग वे अन्य आर्थिक गतिविधियों और बच्चों की देखभाल में कर पा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नल से जल आने के बाद उनके दैनिक जीवन की सबसे बड़ी चिंता दूर हो गई है।

योजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सरकार केवल पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जल की गुणवत्ता (Water Quality) पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गांव-गांव में जल स्वच्छता समितियों का गठन किया गया है और महिलाओं को 'फील्ड टेस्ट किट' (FTK) के माध्यम से पानी की जांच करने का प्रशिक्षण दिया गया है। इससे फ्लोराइड या अन्य अशुद्धियों से होने वाली बीमारियों के खतरे में भारी कमी आई है, जिससे स्वास्थ्य खर्च भी कम हुआ है।

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के लाखों परिवारों को अब तक क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) प्रदान किए जा चुके हैं। दुर्ग, राजनांदगांव और रायपुर जैसे जिलों में काम तेजी से पूरा हो रहा है, वहीं बस्तर और सरगुजा जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी सोलर पंप आधारित जलापूर्ति योजनाओं के जरिए पानी पहुँचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्रियों द्वारा लगातार जिलों का दौरा कर इन परियोजनाओं की जमीनी हकीकत की समीक्षा की जा रही है।

आने वाले समय में इस मिशन का लक्ष्य शत-प्रतिशत ग्रामीण घरों को कवर करना है। जल जीवन मिशन न केवल बुनियादी ढांचे का विकास है, बल्कि यह सस्टेनेबल वॉटर मैनेजमेंट की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। इसके साथ ही गांवों में 'ग्रे-वाटर मैनेजमेंट' (इस्तेमाल किए गए पानी का पुनर्चक्रण) पर भी काम किया जा रहा है ताकि जल संरक्षण सुनिश्चित हो सके। 'हर घर जल' की यह उपलब्धि राज्य के समग्र विकास और ग्रामीण सशक्तिकरण की एक नई गाथा लिख रही है।

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