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इंदौर में दूषित पानी का कहर: 17वीं मौत से मचा हड़कंप, 9 हजार से ज्यादा लोगों की जांच; हाईकोर्ट में पेश होगी रिपोर्ट...

इंदौर, मध्य प्रदेश: 'मिनी मुंबई' कहे जाने वाले इंदौर का भागीरथपुरा क्षेत्र इस वक्त भीषण स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। दूषित पानी पीने से फैल रही बीमारी ने अब तक 17 लोगों की जान ले ली है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा युद्ध स्तर पर चलाए जा रहे जांच अभियान के दौरान अब तक 9,416 लोगों का परीक्षण किया जा चुका है, जिसमें रविवार को 20 नए मरीज सामने आए हैं। इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लेते हुए मामला अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुँच गया है।

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, भागीरथपुरा और आसपास की बस्तियों में फैली इस बीमारी का मुख्य कारण पेयजल पाइपलाइनों में सीवेज के पानी का मिलना बताया जा रहा है। नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम घर-घर जाकर सर्वे कर रही है। अब तक हजारों लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें से कई लोगों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसे लक्षण पाए गए हैं। नए मरीजों के मिलने से इलाके में दहशत का माहौल है।
इस त्रासदी पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने प्रशासन से अब तक की गई कार्रवाई और मौतों के कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जिला प्रशासन और नगर निगम सोमवार को हाईकोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश करेंगे। माना जा रहा है कि कोर्ट लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी टिप्पणी या कार्रवाई के निर्देश दे सकता है।
नगर निगम ने प्रभावित क्षेत्रों में पानी की सप्लाई बंद कर टैंकरों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराना शुरू किया है। पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को बदलने का काम जारी है, लेकिन स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन ने शुरुआत में शिकायतों को नजरअंदाज किया, जिसका खामियाजा 17 परिवारों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र में अस्थायी कैंप लगाकर इलाज की व्यवस्था की है।
इंदौर कलेक्टर और निगमायुक्त लगातार क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं। विशेषज्ञों की टीम पानी के नमूनों की जांच कर रही है ताकि बैक्टीरिया के सटीक प्रकार (जैसे ई-कोलाई या कॉलरा) का पता लगाया जा सके। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे पानी उबालकर ही पिएं और किसी भी तरह की बेचैनी महसूस होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में रिपोर्ट करें।







