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सरहद की 'दुर्गा': पाकिस्तानी आतंकियों से लोहा लेंगी जम्मू की अनीता-सोनाली, सेना दे रही है हथियारों की ट्रेनिंग

National RRT News Desk 05 January 2026

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जम्मूl जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में बढ़ते आतंकी खतरों के बीच अब 'आधी आबादी' ने मोर्चा संभाल लिया है। राजौरी और पुंछ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विलेज डिफेंस गार्ड (VDG) को फिर से सक्रिय किया गया है, जिसमें अनीता और सोनाली जैसी युवा महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। ये बेटियां अब घर के चूल्हे-चौके के साथ-साथ हाथों में 303 राइफल थामकर देश के दुश्मनों और पाकिस्तानी आतंकियों को धूल चटाने के लिए तैयार हैं।

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भारतीय सेना इन महिला वालंटियर्स को आधुनिक हथियारों को चलाने, गश्त करने और आपातकालीन स्थिति में फायरिंग करने की कड़ी ट्रेनिंग दे रही है। सेना के विशेष कैंपों में अनीता और सोनाली जैसे दर्जनों ग्रामीण युवाओं को यह सिखाया जा रहा है कि कैसे आतंकियों के अचानक हमले को नाकाम करना है और सुरक्षा बलों के पहुँचने तक इलाके की रक्षा करनी है। अनीता का कहना है कि, "हमें डर नहीं लगता, अगर आतंकी गांव में घुसने की कोशिश करेंगे तो हम उन्हें जिंदा वापस नहीं जाने देंगे।"

जम्मू संभाग में हाल के महीनों में हुए आतंकी हमलों के बाद ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी थी। इसी को देखते हुए गृह मंत्रालय और सेना ने VDG को मजबूत करने का फैसला किया है। इन महिला गार्ड्स को न केवल हथियार दिए गए हैं, बल्कि उन्हें नाइट विजन डिवाइसेस और संचार के साधनों से भी लैस किया जा रहा है। पहाड़ी रास्तों पर सेना के जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर गश्त करती इन महिलाओं ने सुरक्षा का नया घेरा तैयार कर दिया है।

सोनाली, जो खुद एक कॉलेज छात्रा है, बताती है कि उसने VDG जॉइन की है ताकि वह अपने परिवार और गांव की सुरक्षा कर सके। सेना के अधिकारी इन महिलाओं के जज्बे को देखकर हैरान हैं। ट्रेनिंग के दौरान ये महिलाएं अचूक निशाना साध रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय लोगों का सुरक्षा तंत्र में शामिल होना खुफिया जानकारी जुटाने और आतंकियों की गतिविधियों को रोकने में 'गेम चेंजर' साबित होगा।

इस पहल से न केवल सीमावर्ती गांवों में आत्मविश्वास लौटा है, बल्कि यह पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत मनोवैज्ञानिक संदेश भी है। विलेज डिफेंस गार्ड के सक्रिय होने से अब आतंकी खुलेआम गांवों में छिपने या रसद जुटाने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं। अनीता और सोनाली की यह कहानी अब पूरे जम्मू-कश्मीर में चर्चा का विषय बनी हुई है और कई अन्य लड़कियां भी आत्मरक्षा के लिए ट्रेनिंग लेने आगे आ रही हैं।

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