जबलपुर। शहर में नलों से गंदा और संदिग्ध पानी आने की शिकायतें अब गंभीर रूप ले चुकी हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। नागरिकों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो जबलपुर भी बड़े जल संकट की ओर बढ़ सकता है।
शिकायतों के अनुसार कई इलाकों में नलों से आने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। पानी में गंदगी, बदबू और रंग बदलने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। मजबूरी में लोग पानी को उबालकर या फिल्टर कर इस्तेमाल कर रहे हैं, इसके बावजूद स्वास्थ्य पर खतरा बना हुआ है। बच्चों और बुजुर्गों में पेट से जुड़ी बीमारियों की शिकायतें भी बढ़ी हैं।
पुरानी पाइपलाइन बनी बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि शहर की पुरानी और जर्जर पाइपलाइन, लीकेज और सीवेज लाइन से नजदीकी संपर्क के कारण पानी दूषित हो रहा है। बारिश के दौरान यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जब गंदा पानी पाइपलाइन में मिल जाता है।
हाईकोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ पानी को नागरिकों का मूल अधिकार बताया और प्रशासन से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने कहा कि यदि समय पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासन ने दावा किया है कि जल आपूर्ति व्यवस्था की नियमित जांच की जा रही है और जहां भी शिकायतें मिल रही हैं, वहां सुधार कार्य किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पाइपलाइन सुधार और जल गुणवत्ता परीक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है।
लोगों की मांग
शहरवासियों ने मांग की है कि
पुरानी पाइपलाइन तुरंत बदली जाए
जल टंकियों और फिल्टर प्लांट की नियमित सफाई हो
पानी की गुणवत्ता रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए








