तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान में छात्राओं को निशाना बनाकर किए गए हालिया हमलों ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। विशेष रूप से दक्षिण ईरान के मिनाब (Minab) स्थित एक लड़कियों के स्कूल पर हुए घातक हमले में दर्जनों छात्राओं की मौत की खबर के बाद ईरान के भीतर और बाहर मातम के साथ-साथ भारी आक्रोश देखा जा रहा है। खून से सने बच्चों के स्कूल बैग और मलबे की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर गुस्से का सैलाब ला दिया है। ईरान सरकार ने इन हमलों के लिए 'विदेशी ताकतों' और 'दुश्मन देशों' को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि मानवाधिकार संगठन नागरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
इस त्रासदी पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी बेहद तीखी रही है। अमेरिका ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि वह स्कूलों जैसे नागरिक ठिकानों को जानबूझकर निशाना नहीं बनाता, लेकिन इस घटना को 'अत्यंत दुखद' करार दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि शिक्षा संस्थानों पर हमले युद्ध अपराध की श्रेणी में आते हैं। वहीं, इसराइल की ओर से आए बयानों में ईरान के भीतर चल रही अस्थिरता और सैन्य ठिकानों पर की गई कार्रवाई का जिक्र किया गया है, लेकिन स्कूल पर हमले के आरोपों को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। दोनों देशों ने ईरान के इन दावों को खारिज करने का प्रयास किया है कि यह हमला जानबूझकर किया गया था।
ईरान के भीतर स्थिति यह है कि डरे हुए अभिभावक अब अपनी बेटियों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) और मलाला यूसुफजई जैसी हस्तियों ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। ईरान में पहले से ही चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच, छात्राओं की मौत ने आग में घी डालने का काम किया है। लोग सड़कों पर उतरकर न्याय की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद ईरान और पश्चिमी देशों के बीच कूटनीतिक दरार और अधिक गहरी हो सकती है, जिससे आने वाले दिनों में क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने की पूरी आशंका है।








