जबलपुर। शहर में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति को लेकर किए जा रहे दावे हकीकत से कोसों दूर नजर आ रहे हैं। कई इलाकों में नलों से ऐसा पानी आ रहा है, जो देखने में साफ जरूर लगता है, लेकिन जांच में वह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक पाया गया है। पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों के कारण गंदा पानी पीने के पानी में मिल रहा है, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
शहर के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए परीक्षणों में पानी की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई। जांच के दौरान पानी में घुलनशील ठोस पदार्थों (TDS) का स्तर सामान्य से कई गुना अधिक दर्ज हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार पीने के पानी में टीडीएस की मात्रा सीमित होनी चाहिए, लेकिन जबलपुर के कई इलाकों में यह स्तर तय मानकों से काफी ऊपर पाया गया।
पाइपलाइन बनी सबसे बड़ी समस्या
जानकारों का कहना है कि शहर की अधिकतर जल आपूर्ति पाइपलाइनें दशकों पुरानी हैं और कई स्थानों पर ये नालियों के नीचे से गुजर रही हैं। पाइपलाइन में लीकेज और जंग के कारण सीवेज का पानी सप्लाई लाइन में मिल रहा है। यही वजह है कि जल शुद्धिकरण केंद्र से साफ निकलने वाला पानी घरों तक पहुंचते-पहुंचते दूषित हो जा रहा है।
सेहत पर पड़ सकता है गंभीर असर
दूषित पानी के लगातार सेवन से पेट संबंधी बीमारियां, किडनी की समस्या, पथरी, त्वचा रोग और बच्चों में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक ऐसा पानी पीना जानलेवा भी साबित हो सकता है।
इलाकों में बढ़ी चिंता
कई मोहल्लों के रहवासियों ने शिकायत की है कि पानी से बदबू आती है और कई बार रंग भी बदल जाता है। मजबूरी में लोग आरओ या बोतलबंद पानी का सहारा ले रहे हैं, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
प्रशासन के दावे, जनता परेशान
नगर प्रशासन की ओर से समय-समय पर पानी की जांच और सुधार के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी नहीं सुधरे हैं। लोगों का कहना है कि जब तक पुरानी पाइपलाइनों को पूरी तरह नहीं बदला जाता, तब तक समस्या खत्म होना मुश्किल है।








