जैन समाज की ओर से बच्चों के सर्वांगीण विकास और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से विभिन्न स्पर्धाओं का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समाज के नन्हे-मुन्नों से लेकर युवाओं ने अपनी कला, ज्ञान और खेल कौशल का शानदार प्रदर्शन किया।
विविध प्रतियोगिताओं का संगम
आयोजन के दौरान बच्चों की प्रतिभा को निखारने के लिए कई श्रेणियों में प्रतियोगिताएं रखी गई थीं:
धार्मिक ज्ञान क्विज: बच्चों ने जैन धर्म के सिद्धांतों, तीर्थंकरों और इतिहास से जुड़े सवालों के बड़ी चतुराई से जवाब दिए।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: रंगारंग कार्यक्रमों में बच्चों ने फैंसी ड्रेस, नृत्य और एकांकी के माध्यम से सामाजिक संदेश दिए। कई बच्चों ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' और 'अहिंसा परमो धर्म' जैसे विषयों पर मार्मिक प्रस्तुति दी।
खेलकूद और चित्रकला: चित्रकला स्पर्धा में बच्चों ने पर्यावरण और शांति के रंगों को कैनवास पर उकेरा, वहीं खेलकूद में अपनी शारीरिक क्षमता का परिचय दिया।
संस्कार और शिक्षा का मेल
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जैन मुनियों और समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया। वक्ताओं ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि उनमें संस्कार और अनुशासन की भावना भी जागृत होती है। आधुनिक युग में अपनी संस्कृति को सहेजने के लिए ऐसे मंच अत्यंत आवश्यक हैं।
पुरस्कार वितरण समारोह
प्रतियोगिता के अंत में निर्णायक मंडल द्वारा चयनित विजेताओं को मेडल, प्रमाण पत्र और पुरस्कार प्रदान किए गए। बच्चों की इस उपलब्धि पर उनके अभिभावकों ने भी गर्व व्यक्त किया। समाज के पदाधिकारियों ने संकल्प लिया कि भविष्य में भी बच्चों की प्रतिभा को निखारने के लिए ऐसे आयोजन निरंतर किए जाते रहेंगे।








