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इंजीनियरिंग नहीं, मुझे नौकरी करनी है...': बिलासपुर का लापता छात्र मुंबई में मिला, पिता को भेजा भावुक संदेश

बिलासपुर- करियर के दबाव और पारिवारिक उम्मीदों के बोझ तले दबे एक 17 वर्षीय छात्र की कहानी ने सबको झकझोर कर रख दिया है। बिलासपुर के तारबाहर थाना क्षेत्र स्थित विद्यानगर हॉस्टल से लापता हुए जेईई (JEE) के छात्र का सुराग आखिरकार मुंबई में मिला है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे इस छात्र ने इंजीनियरिंग के भारी दबाव से तंग आकर हॉस्टल छोड़ दिया और आर्थिक स्वतंत्रता की तलाश में मुंबई निकल गया। इस घटना ने एक बार फिर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और करियर के चुनाव में उनकी व्यक्तिगत इच्छाओं के महत्व पर बहस छेड़ दी है।

लापता होने के बाद छात्र ने अपने पिता को एक बेहद भावुक संदेश भेजा, जिसमें उसने अपने मन की बात खुलकर साझा की। छात्र ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह इंजीनियर नहीं बनना चाहता और इंजीनियरिंग की पढ़ाई का दबाव अब उसके बस से बाहर है। उसने संदेश में लिखा कि वह अपनी पसंद का काम करना चाहता है और नौकरी कर आत्मनिर्भर बनना चाहता है। पिता को भेजे गए इस मैसेज ने शिक्षा व्यवस्था और अभिभावकों की महत्वाकांक्षाओं के बीच पिसते युवाओं की पीड़ा को उजागर किया है।
पुलिस और परिजनों की सक्रियता से छात्र को सुरक्षित ट्रैक कर लिया गया है, लेकिन यह मामला समाज के लिए एक चेतावनी की तरह है। बिलासपुर पुलिस ने तकनीकी जांच के जरिए छात्र की लोकेशन मुंबई में पाई और उसे वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल डिग्री के पीछे भागने के बजाय बच्चों के कौशल और उनकी रुचि को पहचानना अनिवार्य है। यह घटना दर्शाती है कि मानसिक दबाव में आकर बच्चे आत्मघाती कदम उठाने या घर छोड़ने जैसे फैसले लेने पर मजबूर हो रहे हैं, जिन्हें केवल संवाद और समझदारी से रोका जा सकता है।







