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बड़ा फैसला: मनरेगा का नाम बदला, अब 'पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना'; काम के दिन भी बढ़े...
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ग्रामीण विकास से जुड़ी एक बड़ी योजना पर अहम फैसला लिया गया है। देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मनरेगा (MGNREGA) का नाम बदल दिया गया है। अब इसे 'पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना' के नाम से जाना जाएगा। इसके साथ ही, इस योजना के तहत काम के दिनों की संख्या में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है, जो ग्रामीण श्रमिकों के लिए एक बड़ी राहत है।

रोजगार के दिनों में 25% की बढ़ोतरी, 100 से बढ़कर हुए 125 दिन
केंद्रीय कैबिनेट के इस फैसले से मनरेगा (अब 'पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना') के तहत मिलने वाले रोजगार की सीमा बढ़ा दी गई है। अभी तक ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन के काम की गारंटी मिलती थी। इस सीमा को अब 25% बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। सरकार का यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती बेरोजगारी और आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के लिए उठाया गया है, जिससे ज्यादा से ज्यादा परिवारों को आय सुरक्षा मिल सकेगी।
नाम बदलने का कारण: महात्मा गांधी के नाम और मूल्यों को सम्मान
मनरेगा का नाम बदलकर 'पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना' करने का फैसला महात्मा गांधी के नाम और उनके ग्रामीण विकास के मूल्यों को सम्मान देने के उद्देश्य से लिया गया है। मनरेगा योजना का पूरा नाम पहले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम था। अब नए नामकरण के माध्यम से सरकार ने राष्ट्रपिता की विचारधारा को योजना के मूल में और मजबूती से स्थापित करने का प्रयास किया है, ताकि यह योजना उनके ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ सके।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा, आय सुरक्षा मजबूत होगी
रोजगार के दिनों की संख्या 125 करने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा और बड़ा सहारा मिलने की उम्मीद है। 25 अतिरिक्त दिन का काम मिलने से ग्रामीण परिवारों की वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह कदम उन गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा, जो कृषि पर निर्भर नहीं हैं और साल भर रोजगार के लिए इस योजना पर निर्भर रहते हैं। यह फैसला कोविड-19 महामारी के बाद से प्रभावित हुई ग्रामीण आय सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पूरे देश में लागू होगा फैसला: ग्रामीण विकास में मील का पत्थर
कैबिनेट का यह फैसला देश भर के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से लागू होगा। यह सिर्फ योजना का नाम बदलने का नहीं, बल्कि इसके दायरे और प्रभाव को बढ़ाने का भी एक प्रयास है। केंद्र सरकार का मानना है कि 'पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना' ग्रामीण भारत के बुनियादी ढांचे के विकास, जल संरक्षण और टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण को नई गति देगी। यह निर्णय ग्रामीण विकास और गरीबों को आय गारंटी देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।







