Breaking
- Accident News: जोक नदी हादसे में पांचवें दिन मिला लापता भागीरथी साहू का शव
- Crime News: रेलवे ठेकेदार के चौकीदार की सिर पर वार कर हत्या, CCTV फुटेज से आर...
- Cyber Crime News: 500 रुपये की ड्रेस के चक्कर में नर्स से करीब 1 लाख की ठगी, ...
- Raipur Education News: दृष्टिबाधित विद्यार्थियों की शिक्षा को आसान बना रहा ऑड...
- Chennai Tourism News: दक्षिण भारत के पर्यटन बाजार में छत्तीसगढ़ की दस्तक, 130...
- Raigarh Property News: महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री पर बड़ी राहत, शुल्...
- Raipur PWD News: बरसात के बाद निर्माण कार्यों को मिलेगी रफ्तार, अक्टूबर में ह...
- Chhattisgarh Industrial News: माइनिंग से हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग तक नई औद्...
- Cultural News: गुदुम बाजा और मोहरी की धुनों से गूंजा ‘रंग-तरंग’, लोक संस्कृति...
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से अन्नू तिवारी को मिला मातृत्व का आर्थिक सहारा...
मुंह का कैंसर और शराब: टाटा इंस्टीट्यूट की रिसर्च में बड़ा खुलासा; 'एक पेग' भी है जानलेवा

भारत में कैंसर के इलाज के लिए प्रसिद्ध टाटा मेमोरियल सेंटर (TMC) के शोधकर्ताओं ने एक नया अध्ययन प्रकाशित किया है, जो 'सोशल ड्रिंकिंग' या सीमित शराब पीने वालों के लिए खतरे की घंटी है। रिसर्च के अनुसार, भारत में मुंह के कैंसर (Mouth Cancer) के मामलों में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है और इसका मुख्य कारण शराब और बिना धुएं वाला तंबाकू (खैनी, गुटखा) का बढ़ता सेवन है। चौंकाने वाली बात यह है कि शोध ने उस धारणा को खारिज कर दिया है जिसमें कहा जाता था कि 'कम मात्रा' में शराब पीना सुरक्षित है।

रिसर्च के 3 सबसे डरावने सच
एक पेग का खतरा: शोधकर्ताओं के अनुसार, शराब का एक छोटा पेग (करीब 30ml) भी मुंह की कोशिकाओं के DNA को नुकसान पहुँचाने के लिए काफी है। यह धीरे-धीरे कैंसरकारी ट्यूमर विकसित होने का मार्ग प्रशस्त करता है।
तंबाकू के साथ घातक मेल: यदि कोई व्यक्ति तंबाकू (गुटखा/खैनी) के साथ शराब का सेवन करता है, तो कैंसर का खतरा 10 से 15 गुना बढ़ जाता है। शराब मुंह की परत को पतला कर देती है, जिससे तंबाकू के रसायन रक्त में आसानी से घुल जाते हैं।
युवाओं में बढ़ते मामले: पहले मुंह का कैंसर 50 साल की उम्र के बाद देखा जाता था, लेकिन अब टाटा इंस्टीट्यूट के डेटा के अनुसार, 20 से 40 वर्ष के युवाओं में इसके मामले सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं।
इन शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अध्ययन में यह भी बताया गया है कि भारत में 70% मरीज तब अस्पताल पहुँचते हैं जब कैंसर तीसरी या चौथी स्टेज पर होता है। यदि ये लक्षण दिखें तो तुरंत जांच कराएं:
मुंह में कोई ऐसा छाला या घाव जो 2-3 हफ्तों में ठीक न हो रहा हो।
मुंह के अंदर सफेद या लाल रंग के धब्बे (Leukoplakia/Erythroplakia)।
खाना निगलने में तकलीफ या आवाज में भारीपन आना।
जबड़े में सूजन या दांतों का अचानक ढीला होना।
मुंह खोलने में परेशानी होना (कम उंगलियां जाना)।
क्यों बढ़ रहे हैं भारत में मामले?
टाटा मेमोरियल सेंटर के विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में बिना धुएं वाले तंबाकू का उपयोग दुनिया में सबसे अधिक है। इसके साथ ही, बदलती जीवनशैली और शराब की बढ़ती स्वीकार्यता ने इस स्थिति को 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी' बना दिया है। शोध में सुझाव दिया गया है कि शुरुआती पहचान (Early Screening) ही इस जानलेवा बीमारी से बचने का एकमात्र प्रभावी तरीका है।
सावधानी ही बचाव है: विशेषज्ञों की सलाह है कि 'मॉडरेशन' (सीमित मात्रा) के धोखे में न रहें। कैंसर से बचने के लिए शराब और तंबाकू का पूर्ण त्याग ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।





-1784293643055_m~2.webp)

