नगर निगम की मेयर-इन-काउंसिल (MIC) की बैठक आज हंगामे की भेंट चढ़ गई। शहर के विकास कार्यों और बजट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाई गई इस बैठक में विकास की जगह विवाद हावी रहा। विवाद की मुख्य वजह बैठक में सभापति (Chairman) की उपस्थिति को लेकर रही, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच जमकर जुबानी जंग हुई।
विवाद की जड़: सभापति की मौजूदगी पर आपत्ति
बैठक शुरू होते ही कुछ पार्षदों ने सभापति की उपस्थिति पर तकनीकी और वैधानिक सवाल उठा दिए। पार्षदों का तर्क था कि एमआईसी की गुप्त बैठक में नियमों के अनुसार केवल चयनित सदस्य और संबंधित अधिकारी ही उपस्थित रह सकते हैं।
विपक्ष का आरोप: विपक्षी पार्षदों ने आरोप लगाया कि सभापति की मौजूदगी नियमों के विरुद्ध है और इससे चर्चा की गोपनीयता प्रभावित होती है।
सत्ता पक्ष का बचाव: वहीं सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कहा कि सभापति नगर निगम के गरिमामय पद पर हैं और वे मार्गदर्शन के लिए उपस्थित हो सकते हैं।
जमकर हुई नारेबाजी और तीखी नोकझोंक
दलीलों का दौर जल्द ही हंगामे में बदल गया। पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और एक समय ऐसा आया जब पार्षद टेबल थपथपाकर विरोध जताने लगे। हंगामे के कारण करीब आधे घंटे तक बैठक की कार्यवाही बाधित रही। स्थिति को बिगड़ता देख नगर निगम आयुक्त और मेयर को हस्तक्षेप करना पड़ा, लेकिन पार्षद शांत होने को तैयार नहीं थे।
विकास कार्य हुए प्रभावित
इस हंगामे के कारण शहर की सफाई व्यवस्था, नई सड़कों के निर्माण और जल आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो सकी। अधिकारियों ने बताया कि एजेंडे में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल थे, जिन्हें अब अगली बैठक के लिए टाल दिया गया है। आम जनता में इस बात को लेकर काफी नाराजगी है कि पार्षदों की आपसी लड़ाई के कारण शहर के बुनियादी विकास के काम रुके हुए हैं।








