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Lokrang Parv: 6 से 8 सितंबर तक लोकधुनों और लोकगाथाओं से सजेगा मुक्ताकाशी मंच

रायपुर, 5 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, लोकगाथाओं और पारंपरिक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से राजधानी रायपुर में तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम 6, 7 और 8 सितंबर को महंत घासीदास संग्रहालय परिसर स्थित मुक्ताकाशी मंच, सिविल लाइंस में होगा। तीनों दिन कार्यक्रम की शुरुआत शाम 7 बजे से होगी।

भरथरी-पंडवानी से लेकर पंथी और करमा तक
‘लोकरंग पर्व’ में छत्तीसगढ़ की अलग-अलग लोक विधाओं को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम में भरथरी, पंडवानी, ढोलामारू, लोरिकचंदा, नाचा और गम्मत जैसी लोकगाथाओं और लोकनाट्य शैलियों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
इसके साथ ही सुआ, करमा और पंथी जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों के जरिए छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और जनजातीय जीवन की सांस्कृतिक झलक देखने को मिलेगी। लोकगायन की विभिन्न शैलियों में बांसगीत, देवारगीत, ददरिया, जसगीत और संस्कार गायन भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगे।
लोक कलाकारों को मिलेगा अपनी कला दिखाने का मंच
लोकरंग पर्व का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक मनोरंजन तक सीमित नहीं है। इसके जरिए छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककलाओं और लोक कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।
लोकगीतों, लोकगाथाओं, नृत्य और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण एवं जनजातीय समाज की जीवनशैली, सामाजिक परंपराओं और लोक आस्थाओं की झलक प्रस्तुत की जाएगी। इससे युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।
तीन शाम छत्तीसगढ़ी संस्कृति के नाम
6 से 8 सितंबर तक मुक्ताकाशी मंच पर लगातार तीन शाम छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के अलग-अलग रंग देखने को मिलेंगे। पारंपरिक वाद्यों की गूंज, लोकगीतों की मिठास और लोकनृत्यों की लय के साथ मंच पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता जीवंत होगी।
आयोजन के माध्यम से प्रदेश की लोक परंपराओं को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने और लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। रायपुर के कला एवं संस्कृति प्रेमियों के लिए यह तीन दिवसीय आयोजन खास आकर्षण का केंद्र रहने वाला है।
कार्यक्रम की जानकारी
आयोजन: लोकरंग पर्व
तारीख: 6, 7 और 8 सितंबर 2026
समय: शाम 7 बजे से
स्थान: मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस, रायपुर
मुख्य आकर्षण: भरथरी, पंडवानी, नाचा, गम्मत, पंथी, करमा, सुआ, ददरिया, देवारगीत और जसगीत






