मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम (Rosatom) ने एक चौंकाने वाला बयान जारी करते हुए कहा है कि ईरान के परमाणु संयंत्र पर हुआ हालिया हमला "नियंत्रण से बाहर" (Out of Control) हो सकता है। रोसाटॉम, जो ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे के निर्माण और रखरखाव में तकनीकी रूप से शामिल रही है, ने चेतावनी दी है कि संयंत्र को हुए नुकसान से रेडियोधर्मी रिसाव (Radioactive Leak) का खतरा पैदा हो गया है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में रेडिएशन के फैलने को लेकर दहशत का माहौल है।
रोसाटॉम के विशेषज्ञों के अनुसार, परमाणु संयंत्र पर किए गए हमलों ने उन सुरक्षा प्रणालियों को नुकसान पहुंचाया है जो रिएक्टर को ठंडा रखने और परमाणु सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए जिम्मेदार होती हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया कि यदि स्थिति को तुरंत नहीं संभाला गया, तो यह चेरनोबिल या फुकुशिमा जैसी बड़ी परमाणु त्रासदी में बदल सकती है। रूस ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए एक आत्मघाती कदम बताया है। हालांकि, अभी तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमले के पीछे किस देश या समूह का हाथ है।
ईरान के परमाणु संयंत्र पर हुए इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी आपातकालीन बैठक बुलाई है। दुनिया भर के वैज्ञानिक और सुरक्षा विशेषज्ञ अब हवा के रुख और रेडिएशन के स्तर की निगरानी कर रहे हैं, क्योंकि किसी भी प्रकार का रिसाव न केवल ईरान, बल्कि पड़ोसी देशों और उससे आगे तक तबाही मचा सकता है। तेल की कीमतों में भी इस खबर के बाद भारी उछाल देखा गया है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की संभावना अब सीधे परमाणु युद्ध के खतरे में बदलती दिख रही है।
फिलहाल, ईरान की ओर से संयंत्र को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है, लेकिन रोसाटॉम का "बेकाबू" होने वाला बयान स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। अमेरिका, चीन और यूरोपीय देशों ने संयम बरतने की अपील की है, लेकिन जमीन पर तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। यदि स्थिति बिगड़ती है, तो यह आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा परमाणु संकट साबित हो सकता है। दुनिया भर की नजरें अब रूस और ईरान के अगले तकनीकी अपडेट पर टिकी हैं कि क्या इस संभावित आपदा को रोका जा सकता है।








