Breaking
- Health Chhattisgarh: स्वाइन फ्लू के 110 मामले, रायपुर में सबसे ज्यादा 56 मरीज
- Chhattisgarh LPG News: e-KYC पूरा नहीं कराने वालों के गैस कनेक्शन पर असर, 6 ल...
- Women Empowerment Chhattisgarh: महतारी वंदन की 31वीं किस्त से कुसुम की रक्षाब...
- Sports Raipur: राष्ट्रीय खेल दिवस पर केटीयू में पारंपरिक और नवाचारी खेलों की धूम
- Education Chhattisgarh: राज्यपाल रमेन डेका ने विद्यार्थियों से कहा- लक्ष्य के...
- Sports Chhattisgarh: खेल प्रतिभाओं को सम्मान, 666 खिलाड़ियों-प्रशिक्षकों को म...
- Sports News: छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास को मिला नया मंच, मुख्यमंत्री साय ने ‘हमा...
- Education News: लक्ष्य को जुनून बनाकर मेहनत करें, सफलता जरूर मिलेगी—राज्यपाल ...
- Bastar Peace: 25 साल नक्सली संगठन में रहीं मीना ने जवानों की कलाई पर बांधी रा...
- Ration Dealers: 250 रुपये कमीशन की मांग के बीच 11 रुपये की बढ़ोतरी से विक्रेत...
छत्तीसगढ़ की 'सिल्क सिटी' जहाँ का कोसा रेशम बना है ग्लोबल ब्रांड, जानिए क्यों है इसकी इतनी मांग

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले को 'सिल्क सिटी' के रूप में एक विशेष पहचान प्राप्त है, और यह ख्याति उसे यहाँ के विश्व प्रसिद्ध 'कोसा रेशम' (Kosa Silk) ने दिलाई है। राज्य के मध्य में स्थित यह जिला न केवल अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, बल्कि यह पारंपरिक कोसा उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र भी है। यहाँ निर्मित कोसा रेशम की चमक, मजबूती और बनावट इतनी उत्कृष्ट है कि यह अब केवल स्थानीय बाजार तक सीमित न रहकर एक 'ग्लोबल ब्रांड' बन चुका है। दुनियाभर के लोग यहाँ के परिधानों की सादगी और उसकी कारीगरी के कायल हैं।

कोसा रेशम के उत्पादन में जांजगीर-चांपा की कुशलता का राज यहाँ की पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही पारंपरिक बुनाई तकनीकों में छिपा है। कोसा के रेशे को 'एन्थिरिया मायलिटा' नामक जंगली रेशम के कीड़ों से प्राप्त किया जाता है, जो मुख्य रूप से अर्जुन, साल और साजा के पेड़ों पर पलते हैं। इस रेशम को तैयार करने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल और श्रमसाध्य है, जिसे मुख्य रूप से स्थानीय बुनकर समुदाय (देवांगन जाति के कारीगर) बड़ी बारीकी से पूरा करते हैं। अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन और टिकाऊपन के कारण, यहाँ का कोसा रेशम आधुनिक फैशन जगत में भी पहली पसंद बना हुआ है।
आज जांजगीर-चांपा का यह कुटीर उद्योग आर्थिक उन्नति का एक मजबूत स्तंभ भी है। यहाँ तैयार होने वाली कोसा साड़ियाँ, शर्टिंग और अन्य परिधान अमेरिका, ब्रिटेन और ब्राजील जैसे देशों में निर्यात किए जाते हैं, जिससे स्थानीय कलाकारों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है। कोसा रेशम की इस अंतरराष्ट्रीय मांग ने न केवल छत्तीसगढ़ की कला को दुनिया के मानचित्र पर स्थापित किया है, बल्कि यहाँ के हजारों बुनकरों के जीवन में स्वावलंबन के नए द्वार भी खोले हैं। निश्चित रूप से, जांजगीर-चांपा की यह 'सिल्क सिटी' अपनी मिट्टी की खुशबू को रेशमी धागों में पिरोकर पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर रही है।






