छत्तीसगढ़ सरकार के 'सुशासन तिहार 2026' अभियान के तहत विकास की इबारत अब दफ्तरों से निकलकर राज्य के सबसे दुर्गम और पहुंचविहीन वनांचलों तक पहुँच रही है। इसी कड़ी में सुकमा जिले के कलेक्टर अमित कुमार और पुलिस अधीक्षक (SP) किरण चव्हाण ने सरकारी प्रोटोकॉल और सुख-सुविधाओं को पीछे छोड़कर संवेदनशीलता की एक बड़ी मिसाल पेश की। बुधवार को ये दोनों शीर्ष अधिकारी खुद मोटरसाइकिल संभालकर 30 किलोमीटर लंबे ऊबड़-खाबड़, पथरीले और पहाड़ी रास्तों को पार करते हुए उन इलाकों में पहुँचे, जहाँ गाड़ियों का पहुंचना लगभग नामुमकिन है।
कलेक्टर और एसपी की यह जोड़ी मोटरसाइकिल से सीधे सुदूर ग्राम गोंडेरास और नीलावाया पहुँची। गांव पहुँचते ही अधिकारियों ने वहां 'ग्राम चौपाल' लगाई और जमीन पर बैठकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। सुशासन तिहार के माध्यम से प्रशासन का लक्ष्य 31 व्यक्तिगत सरकारी योजनाओं और 14 सामुदायिक सुविधाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने राशन, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों से जुड़ी अपनी समस्याएं खुलकर साझा कीं, जिन पर कलेक्टर ने मौके पर ही मौजूद अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए।
अधिकारियों के इस सादगीपूर्ण और साहसी रवैये ने ग्रामीणों का दिल जीत लिया। घने जंगलों और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बीच जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को अपने बीच पाकर ग्रामीणों में शासन के प्रति विश्वास और बढ़ गया है। कलेक्टर अमित कुमार ने स्पष्ट किया कि सुशासन का असली अर्थ तभी सार्थक है जब सरकारी योजनाएं बिना किसी बाधा के समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचें। यह दौरा न केवल प्रशासनिक सक्रियता को दर्शाता है, बल्कि बस्तर के इन क्षेत्रों में हो रहे सकारात्मक बदलावों की गवाही भी देता है।






