छत्तीसगढ़ में विकसित भारत-जीरामजी (ग्रामीण रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन) योजना दिव्यांगजनों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है। योजना के तहत अब पात्र हितग्राहियों को 125 दिनों का रोजगार और 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिल रही है। इसके साथ ही उन्हें जिम्मेदारीपूर्ण कार्य सौंपे जाने से आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में भी वृद्धि हुई है।
राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम सुंदरा निवासी चंद्रप्रकाश साहू और डोंगरगांव के ग्राम कोहका की रंभा मंडावी को योजना के तहत मेट की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों का कहना है कि पहले 100 दिनों का रोजगार और कम मजदूरी मिलती थी, जबकि अब बढ़े हुए कार्य दिवस और बेहतर पारिश्रमिक से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। रंभा मंडावी मेट के रूप में कार्य करने के साथ ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दे रही हैं।
दोनों हितग्राहियों को जिले के प्रभारी मंत्री गजेन्द्र यादव द्वारा सम्मानित भी किया गया। उनका कहना है कि इस सम्मान और जिम्मेदारी ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की नई प्रेरणा दी है। उनका मानना है कि वीबी-जीरामजी योजना दिव्यांगजनों के लिए सम्मानजनक रोजगार, आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक भागीदारी का प्रभावी माध्यम बन रही है।






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