Breaking

बचपन के 'टॉपर्स' लाइफ के 'बैकबेंचर'! रिसर्च में खुलासा: क्यों औसत छात्र छूते हैं सफलता के आसमान...

EDUCATION RRT News Desk 25 December 2025

post

शिक्षा जगत और मनोविज्ञान के विशेषज्ञों द्वारा किए गए एक व्यापक शोध में यह बात सामने आई है कि स्कूल और कॉलेज में 'गोल्ड मेडलिस्ट' रहने वाले छात्र अक्सर करियर के मामले में एक औसत स्तर पर ही सिमट कर रह जाते हैं। इसके विपरीत, वे छात्र जिन्हें स्कूल में 'बैकबेंचर' या औसत माना जाता था, वे जीवन के बड़े मंचों पर शानदार प्रदर्शन करते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि किताबी उत्कृष्टता और जीवन की सफलता के बीच का संबंध उतना सीधा नहीं है जितना हम समझते हैं।

Advertisement

इस रिसर्च के अनुसार, टॉपर्स के पीछे रहने का सबसे बड़ा कारण 'परफेक्शनिज्म का डर' (Fear of Failure) है। जो बच्चे हमेशा 90% से ऊपर अंक लाते हैं, वे गलती करने से डरने लगते हैं। जीवन में जोखिम लेना और असफल होकर फिर से उठना सफलता की पहली सीढ़ी है, लेकिन टॉपर्स अक्सर सुरक्षित रास्ता चुनते हैं। वे 'सेट रूल्स' का पालन करने में माहिर होते हैं, लेकिन जब जीवन उनके सामने बिना किसी सिलेबस वाली चुनौतियाँ रखता है, तो वे घबरा जाते हैं।

दूसरी ओर, औसत छात्र या बैकबेंचर बचपन से ही 'क्रिटिकल थिंकिंग' और 'स्ट्रीट स्मार्टनेस' विकसित कर लेते हैं। वे जानते हैं कि सिस्टम को कैसे नेविगेट करना है और कम संसाधनों में कैसे काम चलाना है। शोध बताता है कि इन बच्चों का EQ (इमोशनल इंटेलिजेंस) अक्सर उनके IQ से अधिक प्रभावशाली होता है। वे लोगों से जुड़ने, टीम वर्क करने और कठिन परिस्थितियों में लचीलापन (Resilience) दिखाने में टॉपर्स से कहीं आगे निकल जाते हैं।

आधुनिक कॉर्पोरेट जगत और स्टार्टअप कल्चर में अब केवल 'ग्रेड्स' की अहमियत कम हो रही है। गूगल और एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियों के डेटा भी दिखाते हैं कि वे अब ऐसे लोगों को वरीयता दे रहे हैं जो लीक से हटकर सोच सकते हैं। टॉपर्स अक्सर 'अच्छे कर्मचारी' तो बन जाते हैं, लेकिन लीडर और इनोवेटर वही बनते हैं जिन्होंने कक्षा की चारदीवारी के बाहर की दुनिया को अधिक गहराई से समझा होता है। वे नियमों को तोड़ने और नए रास्ते बनाने का साहस रखते हैं।

निष्कर्ष के तौर पर, यह शोध माता-पिता और शिक्षकों को एक बड़ा संदेश देता है: बच्चों पर केवल टॉप आने का दबाव न डालें। जीवन एक मैराथन है, स्प्रिंट नहीं। बच्चों को असफलता का स्वाद चखने दें, उन्हें जोखिम लेना सिखाएं और उनमें सामाजिक समझ विकसित करें। अंततः, जीवन के रिपोर्ट कार्ड में आपके अंकों से ज्यादा आपकी अनुकूलन क्षमता (Adaptability) और दृढ़ता मायने रखती है।

You might also like!