देश की महत्वाकांक्षी 'भारतमाला परियोजना' के तहत जमीन अधिग्रहण में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का दायरा लगातार गहराता जा रहा है। छत्तीसगढ़ में इस परियोजना को लेकर अब एक और नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ताजा मामला धमतरी जिले के सिवनीकला गांव से सामने आया है, जहां जमीन अधिग्रहण और मुआवजे के वितरण में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और करोड़ों रुपये के घोटाले के गंभीर आरोप लगे हैं। इस गड़बड़ी से आक्रोशित ग्रामीणों ने मामले की आधिकारिक शिकायत आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से की है।
सोमवार को सिवनीकला गांव के बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी शिकायतों और सबूतों के साथ रायपुर स्थित एसीबी/ईओडब्ल्यू कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने जांच अधिकारियों के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए। ग्रामीणों का सीधा और साफ आरोप है कि भारतमाला परियोजना के रूट में आने वाली कीमती जमीनों का भू-माफिया और अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी नामांतरण (म्यूटेशन) किया गया। इसके बाद नियमों को ताक पर रखकर जमीनों का अवैध रूप से कागजों पर बंटवारा दिखाया गया, ताकि सरकार की आंख में धूल झोंककर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त मुआवजा डकारा जा सके।
17 खसरों के कर दिए 90 टुकड़े!
शिकायत पत्र और बयानों में यह चौंकाने वाला दावा किया गया है कि भ्रष्टाचार के इस खेल को अंजाम देने के लिए गांव के महज 17 से 18 मूल खसरों (जमीन के रिकॉर्ड) को फर्जी तरीके से करीब 90 छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर दिया गया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि एक ही जमीन पर पात्रता से कहीं अधिक लोगों को खड़ा करके शासन से भारी-भरकम मुआवजे की राशि ऐंठी जा सके। ग्रामीणों के बयान दर्ज होने के बाद अब ईओडब्ल्यू और एसीबी की टीम इस पूरे फर्जीवाड़े के दस्तावेज खंगालने और जिम्मेदार राजस्व अधिकारियों व बिचौलियों को चिन्हित करने की तैयारी में जुट गई है।







