दिमाग की गंभीर और लाइलाज मानी जाने वाली भूलने की बीमारी 'अल्जाइमर' के इलाज में मेडिकल साइंस को एक बेहद बड़ी और क्रांतिकारी कामयाबी हाथ लगी है। वैज्ञानिकों ने एक नई दवा की खोज की है, जो अल्जाइमर से पीड़ित लाखों मरीजों के जीवन में एक नई उम्मीद की किरण बनकर आई है। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह नई दवा न केवल बीमारी के लक्षणों को बढ़ने से रोकेगी, बल्कि मरीजों की खोई हुई याददाश्त को भी वापस लाने में पूरी तरह सक्षम है। चिकित्सा जगत में इस खोज को एक बड़े गेमचेंजर के रूप में देखा जा रहा है।
इस अभूतपूर्व शोध के मुताबिक, अल्जाइमर के इलाज के लिए तैयार की गई यह विशेष दवा तांबे (Copper) के तत्वों पर आधारित है। वैज्ञानिकों ने पाया कि दिमाग में तांबे के असंतुलन और कॉपर थेरेपी के सही इस्तेमाल से दिमागी कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) को दोबारा सक्रिय किया जा सकता है। यह कॉपर ड्रग दिमाग में जमा होने वाले उन हानिकारक प्रोटीन्स को नष्ट करने में मदद करती है, जो याददाश्त को ब्लॉक करने और ब्रेन सेल्स को डैमेज करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। इस दवा के शुरुआती परीक्षणों के नतीजे बेहद चौंकाने वाले और सकारात्मक रहे हैं।
अब तक अल्जाइमर का कोई सटीक और परमानेंट इलाज उपलब्ध नहीं था, केवल दवाओं के जरिए इसके असर को धीमा किया जाता था। लेकिन इस नई कॉपर थेरेपी आधारित दवा के आने से डॉक्टरों को उम्मीद है कि अब मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य में सीधा सुधार देखा जा सकेगा। यह दवा उन बुजुर्गों और मरीजों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है जो अपनी पहचान और अपनों को भूल चुके हैं। आने वाले समय में इसके व्यापक स्तर पर क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी चल रही है, जिसके बाद इसे आम जनता के इलाज के लिए बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा।







