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BREAKING : क्या सुरक्षित है ओम बिरला की कुर्सी? अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस ने हिलाया दिल्ली का गलियारा, टीएमसी भी पीछे हटी!

BREAKING : नई दिल्ली: लोकसभा में आज एक अभूतपूर्व स्थिति देखने को मिली जब विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का बिगुल फूंक दिया। 118 सांसदों के हस्ताक्षर वाला यह नोटिस सचिवालय को सौंप दिया गया है, लेकिन इस पूरी मुहिम ने एक बड़ा 'सस्पेंस' खड़ा कर दिया है।

खबर की 5 बड़ी बातें
1. 118 सांसदों का साथ, लेकिन राहुल 'आउट': अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्षी खेमे के 118 सांसदों ने दस्तखत किए हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि राहुल गांधी के हस्ताक्षर इस लिस्ट में शामिल नहीं हैं।
2. TMC की 'दूरी' ने बढ़ाई टेंशन: विपक्षी एकता के दावों के बीच ममता बनर्जी की पार्टी (TMC) ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। हालांकि, कांग्रेस इसे महज तकनीकी बात बता रही है।
3. आर्टिकल 94(c) का सहारा: विपक्ष ने संविधान के अनुच्छेद 94(c) का प्रयोग करते हुए यह नोटिस दिया है।
4. नंबर गेम बनाम मैसेज: कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने साफ किया "हमारे पास नंबर नहीं हैं तो क्या हुआ, हम संसद में अपनी आवाज दबाने के खिलाफ एक कड़ा संदेश देना चाहते हैं।"
5. स्पीकर का एक्शन: नोटिस मिलते ही ओम बिरला ने सेक्रेटरी जनरल को इसकी जांच और नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं।
विपक्ष के '4 प्रहार' (आरोप):
विपक्ष ने स्पीकर पर 'पक्षपात' का आरोप लगाते हुए इन बिंदुओं को आधार बनाया है:
बोलने पर पाबंदी: राहुल गांधी को सदन में बोलने से रोकने का मुद्दा।
सख्त कार्रवाई: 8 सांसदों के एक साथ निलंबन का फैसला।
अनदेखी: सत्ता पक्ष के सांसदों की विवादित टिप्पणियों पर कार्रवाई न करना।
मर्यादा: महिला सांसदों को लेकर की गई कथित टिप्पणी।
राहुल गांधी के साइन क्यों नहीं?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राहुल गांधी शायद खुद को सीधे तौर पर इस कानूनी प्रक्रिया के हस्ताक्षरकर्ता के रूप में नहीं जोड़ना चाहते थे, ताकि भविष्य में सदन की कार्यवाही के दौरान 'चेयर' के साथ उनके संवाद की गुंजाइश बनी रहे। वहीं टीएमसी का पीछे हटना विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. के भीतर के मतभेदों को भी उजागर कर रहा है।







