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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का अहम फैसला: विशेष परिस्थितियों में दूसरी पत्नी भी फैमिली पेंशन की हकदार

Chhattisgarh 19 July 2026

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पारिवारिक पेंशन से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। न्यायालय ने कहा कि पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत भले ही वैध न माना जाए, लेकिन केवल इसी आधार पर दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन के अधिकार से स्वतः वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस मामले में पेंशन नियमों की सामाजिक सुरक्षा संबंधी भावना को प्रमुख आधार माना।

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न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 एक कल्याणकारी कानून है, जिसका उद्देश्य आश्रितों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। इसलिए ऐसे मामलों में नियमों की व्याख्या उदार और न्यायसंगत दृष्टिकोण से की जानी चाहिए, ताकि पात्र व्यक्तियों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित न किया जाए।

अदालत के इस फैसले को पारिवारिक पेंशन से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी दृष्टांत माना जा रहा है। हालांकि, प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा। यह फैसला सभी मामलों पर स्वतः लागू नहीं होता, बल्कि संबंधित नियमों और केस के तथ्यों के अनुसार ही इसका प्रभाव होगा।

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