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कंप्यूटर विजन सिंड्रोम: क्या आपकी आंखें डिजिटल थकान की शिकार हैं? जानें बचाव के 12 अचूक तरीके

'कंप्यूटर विजन सिंड्रोम' कोई एक विशेष बीमारी नहीं है, बल्कि उन आंखों और दृष्टि संबंधी समस्याओं का समूह है जो कंप्यूटर, टैबलेट और सेल फोन के लंबे समय तक उपयोग से उत्पन्न होती हैं। जब हम स्क्रीन को देखते हैं, तो हमारी पलकें झपकने की दर 60% तक कम हो जाती है, जिससे आंखों में सूखापन (Dryness) और तनाव बढ़ता है।

इन 5 लक्षणों को कभी न करें इग्नोर
आंखों में थकान और जलन: काम के दौरान आंखों का भारी होना या खुजली महसूस होना।
धुंधला दिखाई देना (Blurred Vision): स्क्रीन से नजर हटाने के बाद दूर की चीजें साफ न दिखना।
सिरदर्द: विशेष रूप से माथे और आंखों के ठीक पीछे होने वाला दर्द।
आंखों का सूखापन: ऐसा महसूस होना जैसे आंखों में रेत या कुछ चुभ रहा हो।
गर्दन और कंधों में दर्द: स्क्रीन पर फोकस करने के लिए गलत पोस्चर (Posture) में बैठने के कारण।
आई स्ट्रेन (Eye Strain) से बचने के 12 प्रभावी टिप्स
20-20-20 का नियम: हर 20 मिनट के काम के बाद, 20 फीट दूर रखी किसी चीज को कम से कम 20 सेकंड तक देखें।
पलकें झपकाएं: जानबूझकर बार-बार पलकें झपकाएं ताकि आंखों में नमी बनी रहे।
स्क्रीन की दूरी: अपनी आंखों और स्क्रीन के बीच कम से कम 20 से 28 इंच (लगभग एक हाथ की दूरी) का फासला रखें।
एंटी-ग्लेयर चश्मा: कंप्यूटर के लिए बने विशेष 'ब्लू कट' लेंस वाले चश्मों का उपयोग करें।
उचित रोशनी: कमरे की रोशनी इतनी होनी चाहिए कि स्क्रीन पर चमक (Glare) न पड़े। खिड़की की रोशनी के ठीक सामने या पीछे न बैठें।
फॉन्ट साइज बढ़ाएं: छोटे अक्षरों को पढ़ने के लिए आंखों पर जोर न डालें, कंप्यूटर की सेटिंग में जाकर टेक्स्ट साइज बड़ा करें।
स्क्रीन का लेवल: स्क्रीन आपकी आंखों के लेवल से 10-15 डिग्री नीचे होनी चाहिए, ताकि पलकें थोड़ी झुकी रहें।
ब्राइटनेस सेट करें: स्क्रीन की ब्राइटनेस उतनी ही रखें जितनी आपके आसपास की रोशनी है। न बहुत ज्यादा, न बहुत कम।
हाइड्रेटेड रहें: शरीर में पानी की कमी आंखों के सूखेपन को बढ़ाती है, इसलिए पर्याप्त पानी पिएं।
आंखों के व्यायाम: दिन में दो बार आंखों को गोल घुमाने (Rotation) और हथेलियों से ढककर गरमाहट देने (Palming) का अभ्यास करें।
डिजिटल डिटॉक्स: सोने से कम से कम 1 घंटा पहले सभी डिजिटल उपकरणों को बंद कर दें।
नियमित जांच: साल में कम से कम एक बार किसी नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist) से अपनी आंखों की जांच जरूर कराएं।







