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दिल्ली: 113 साल पुराने कागज गायब, मस्जिद के मालिकाना हक पर सस्पेंस; कमेटी बोली- 'वक्फ के पास होंगे'
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देश की राजधानी दिल्ली में एक मस्जिद की जमीन के मालिकाना हक को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में जिस इलाके में पत्थरबाजी की घटना हुई थी, वहां स्थित मस्जिद के पास जमीन से जुड़े वैध दस्तावेज नहीं मिले हैं। जांच के दौरान पता चला है कि मस्जिद के 113 साल पुराने कागजात गायब हैं। प्रशासन द्वारा रिकॉर्ड मांगे जाने पर मस्जिद प्रबंधन समिति स्पष्ट उत्तर देने में असमर्थ रही है, जिससे इस ढांचे की कानूनी स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं।

मस्जिद कमेटी के सदस्यों से जब जमीन के मालिकाना हक के बारे में पूछताछ की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में उनके पास कोई पुख्ता दस्तावेज मौजूद नहीं हैं। कमेटी का तर्क है कि यह संपत्ति बहुत पुरानी है और संभवतः इसके तमाम जरूरी कागज वक्फ बोर्ड के पास जमा होंगे। हालांकि, वक्फ रिकॉर्ड में भी इन दस्तावेजों की तत्काल उपलब्धता न होने के कारण स्थिति और अधिक पेचीदा हो गई है। कमेटी का कहना है कि वे पुराने रिकॉर्ड्स को खंगालने की कोशिश कर रहे हैं।
यह मामला उस समय और अधिक संवेदनशील हो गया जब संबंधित इलाके में तनाव की स्थिति बनी। प्रशासन का कहना है कि बिना वैध कागजों के किसी भी निर्माण या सार्वजनिक स्थल की वैधता संदिग्ध हो जाती है। अधिकारियों के मुताबिक, 1911 के आसपास के राजस्व रिकॉर्ड और पुराने नक्शों में भी इस स्थान के स्पष्ट संदर्भों की कमी देखी गई है। गायब दस्तावेजों ने भू-राजस्व विभाग और स्थानीय नगर निकाय के लिए भी सिरदर्द बढ़ा दिया है, क्योंकि यह जमीन बेशकीमती सरकारी भूमि का हिस्सा हो सकती है।
स्थानीय निवासियों और प्रशासन के बीच इस मुद्दे को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि वक्फ बोर्ड या मस्जिद कमेटी समय रहते जमीन के मालिकाना हक के सबूत पेश नहीं कर पाती है, तो इसे अतिक्रमण की श्रेणी में माना जा सकता है। दिल्ली में पिछले कुछ समय से अवैध धार्मिक ढांचों के खिलाफ चल रहे सरकारी अभियान के बीच इस खुलासे ने कानूनी कार्रवाई की संभावनाओं को हवा दे दी है।
फिलहाल, प्रशासन ने मस्जिद कमेटी को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए समय दिया है। साथ ही, वक्फ बोर्ड से भी इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है कि क्या उनके रिकॉर्ड में इस संपत्ति का कोई उल्लेख है या नहीं। तब तक के लिए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है ताकि किसी भी तरह की अफवाह या तनाव को फैलने से रोका जा सके। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या 113 साल पुराने ये गायब कागज कभी सामने आ पाते हैं या नहीं।







