धार की ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला को लेकर कानूनी लड़ाई अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में आज से इस संवेदनशील मामले की नियमित सुनवाई शुरू होने जा रही है। पिछले काफी समय से लंबित इस प्रकरण में कोर्ट की सक्रियता ने दोनों पक्षों की धड़कनों को बढ़ा दिया है, क्योंकि इस सुनवाई के दौरान मालिकाना हक और धार्मिक स्वरूप को लेकर महत्वपूर्ण दलीलें पेश की जानी हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा पूर्व में किए गए वैज्ञानिक सर्वे की रिपोर्ट इस सुनवाई का मुख्य केंद्र बिंदु होगी। कोर्ट ने पूर्व की सुनवाइयों में स्पष्ट किया था कि नियमित सुनवाई के माध्यम से मामले के सभी पहलुओं को बारीकी से परखा जाएगा। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह प्राचीन वाग्देवी का मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद बताते हुए यथास्थिति बनाए रखने की मांग कर रहा है।
प्रशासन ने इस उच्च-प्रोफाइल मामले की सुनवाई को देखते हुए इंदौर और धार दोनों जिलों में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं। सोशल मीडिया पर भी पैनी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह को फैलने से रोका जा सके। कानूनी जानकारों का मानना है कि नियमित सुनवाई शुरू होने से अब सालों से चले आ रहे इस विवाद का तार्किक समाधान जल्द निकल सकता है।
आज की कार्यवाही में पक्षकारों के वकील अपनी प्रारंभिक दलीलें और ASI सर्वे पर अपनी आपत्तियां या समर्थन दर्ज कराएंगे। हाईकोर्ट की जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस गजेन्द्र सिंह की खंडपीठ इस पूरे मामले की सुनवाई कर रही है। पूरे प्रदेश की निगाहें आज कोर्ट रूम से निकलने वाले अपडेट्स पर टिकी हैं, क्योंकि यह फैसला धार की ऐतिहासिक विरासत का भविष्य तय करेगा।








