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तीन बहनों की मौत ने दहलाया देश: क्या 'गेमिंग एडिक्शन' बना काल? मनोचिकित्सक डॉ. आशीष बंसल ने बताया कैसे बचाएं बच्चों की जान...

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन सगी बहनों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने मोबाइल गेमिंग की डार्क दुनिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में 'गेमिंग एडिक्शन' और डिजिटल दबाव को मौत की संभावित वजह माना जा रहा है। इस घटना ने देशभर के अभिभावकों को चिंता में डाल दिया है। आखिर कैसे एक मोबाइल गेम बच्चों को मौत के मुहाने तक धकेल सकता है? वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आशीष बंसल ने इस त्रासदी के पीछे के मनोवैज्ञानिक कारणों और इससे बचने के उपायों पर विस्तार से सलाह दी है।

क्यों घातक होता जा रहा है गेमिंग एडिक्शन?
डॉ. आशीष बंसल के अनुसार, जब बच्चा मोबाइल गेम के प्रभाव में आता है, तो उसके दिमाग में 'डोपामाइन' (Dopamine) का स्तर असामान्य रूप से बढ़ने लगता है।
सोशल आइसोलेशन: बच्चे बाहरी दुनिया से कटकर गेम की आभासी दुनिया को ही सच मानने लगते हैं।
स्लीप डेप्रिवेशन: रात-रात भर जागकर खेलने से उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, जिससे वे चिड़चिड़े और हिंसक हो सकते हैं।
चुनौती का दबाव: कई ऑनलाइन गेम्स में ऐसे टास्क दिए जाते हैं जो उन्हें खुद को नुकसान पहुँचाने के लिए उकसाते हैं।
अभिभावकों के लिए डॉक्टर की 5 बड़ी सलाह
डिजिटल डिटॉक्स: बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम तय करें और रात में सोते समय मोबाइल पास न रखने दें।
व्यवहार पर नजर: यदि बच्चा अचानक चुप रहने लगे, गुस्सा करे या खाना-पीना छोड़ दे, तो यह खतरे की घंटी है।
कम्युनिकेशन: बच्चों से दोस्त बनकर बात करें ताकि वे अपनी डिजिटल लाइफ के बारे में आपको बता सकें।
आउटडोर गेम्स: बच्चों को मैदान में खेलने और सामाजिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।
प्राइवेसी सेटिंग: उनके मोबाइल में पैरेंटल कंट्रोल (Parental Control) ऐप इंस्टॉल करें और आपत्तिजनक कंटेंट ब्लॉक करें।







