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छत्तीसगढ़ धान खरीदी: सुविधाओं के नाम पर किसानों से छलावा, केंद्रों पर अव्यवस्था देख फूटा अन्नदाताओं का गुस्सा...

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का महापर्व जारी है, लेकिन जमीनी हकीकत दावों से कोसों दूर नजर आ रही है। प्रदेश के कई खरीदी केंद्रों पर अपनी उपज बेचने पहुंचे किसानों को भारी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। शासन-प्रशासन द्वारा किसानों को 'स्मार्ट' सुविधाएं देने के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन केंद्रों पर पहुंचते ही अन्नदाताओं को छलावा महसूस हो रहा है। किसानों का आरोप है कि उन्हें बुनियादी जरूरतों के लिए भी घंटों संघर्ष करना पड़ रहा है।

खरीदी केंद्रों पर सबसे बड़ी समस्या बारदाने की कमी और तौल में देरी को लेकर देखी जा रही है। दूर-दराज के गांवों से ट्रैक्टर और गाड़ियों में धान भरकर पहुंचे किसान कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। टोकन कटने के बावजूद कई दिनों तक धान की तौल नहीं हो पा रही है, जिससे किसानों का आर्थिक नुकसान भी बढ़ रहा है और उन्हें अपने घर-परिवार से दूर केंद्रों पर ही डेरा डालना पड़ रहा है।
सुविधाओं के नाम पर केंद्रों में न तो पीने के साफ पानी की व्यवस्था है और न ही किसानों के बैठने के लिए उचित छांव या विश्राम गृह। 'नववर्ष' की रिपोर्ट के अनुसार, कई केंद्रों पर शौचालय जैसी अनिवार्य सुविधाएं भी बदहाल स्थिति में हैं। किसानों का कहना है कि प्रशासन केवल कागजों पर सुशासन का दम भर रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि अपनी ही मेहनत की फसल बेचने के लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है और अपमानित होना पड़ रहा है।
अव्यवस्थाओं से परेशान किसानों का गुस्सा अब फूटने लगा है। कई स्थानों पर किसानों ने खरीदी केंद्रों के प्रभारियों और अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की है। किसानों का तर्क है कि यदि समय रहते बारदाने और तौल मशीनों की संख्या नहीं बढ़ाई गई, तो उनकी फसल खराब हो सकती है। धान की गुणवत्ता और नमी के नाम पर भी किसानों को परेशान किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे खरीदी की प्रक्रिया और भी धीमी हो गई है।
इस पूरे मामले में अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दल सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं, वहीं जिम्मेदार अधिकारी जल्द ही व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का आश्वासन दे रहे हैं। फिलहाल, धान खरीदी केंद्रों पर अफरा-तफरी का माहौल है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सुविधाएं बेहतर नहीं की गईं और खरीदी में तेजी नहीं आई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।







