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तुर्कमान गेट में आधी रात का 'बुलडोजर एक्शन': पत्थरबाजी और आंसू गैस के बीच आपातकाल की यादें ताजा...
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नई दिल्ली: पुरानी दिल्ली का ऐतिहासिक तुर्कमान गेट एक बार फिर तनाव के केंद्र में आ गया है। बुधवार तड़के करीब 1:30 बजे नगर निगम (MCD) ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया। दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद की गई इस कार्रवाई के दौरान इलाके में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसके बाद वहां कर्फ्यू जैसे हालात पैदा हो गए। दुकानों के शटर गिर गए, सड़कों पर बैरिकेडिंग कर दी गई और पैदल चलने वालों तक पर पाबंदी लगा दी गई, जिसने स्थानीय लोगों को 1976 के आपातकाल के दौर की याद दिला दी।

मलबे और तनाव के बीच फैले इस घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब करीब 32 जेसीबी और भारी मशीनरी ने मस्जिद के पास स्थित एक डिस्पेंसरी, बारात घर और सामुदायिक भवन को गिराना शुरू किया। प्रशासन का दावा है कि ये निर्माण सार्वजनिक भूमि पर अवैध रूप से किए गए थे। हालांकि, जैसे ही तोड़फोड़ शुरू हुई, 150 से अधिक लोगों की भीड़ जमा हो गई। इस दौरान भीड़ की ओर से कथित तौर पर पत्थरबाजी की गई, जिसमें चांदनी महल के थाना प्रभारी सहित कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना पड़ा।
सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली पुलिस ने पूरे इलाके को नौ जोनों में बांटकर पैरामिलिट्री फोर्स और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती कर दी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही है और इंटरनेट तथा आवाजाही पर सख्ती बरती जा रही है। पुलिस द्वारा अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सीसीटीवी फुटेज के जरिए पत्थरबाजों की पहचान की जा रही है। अफवाहों को रोकने के लिए पुलिस लगातार शांति समितियों के साथ बैठकें कर रही है।
इस विध्वंस ने तुर्कमान गेट के उन पुराने ज़ख्मों को हरा कर दिया है जब 1976 में आपातकाल के दौरान संजय गांधी के सुंदरीकरण अभियान के तहत यहां बुलडोजर चले थे और बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी धार्मिक ढांचे के खिलाफ नहीं बल्कि केवल उन अवैध निर्माणों पर है जिन्हें अदालत ने हटाने का आदेश दिया था। फिलहाल रामलीला मैदान और आसपास के रास्तों को बंद रखा गया है, जिससे ट्रैफिक पर भी असर पड़ा है।
मौजूदा स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है, हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि मामला नियंत्रण में है। आने वाले कुछ दिनों तक सुरक्षा बलों की तैनाती बरकरार रहने की उम्मीद है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को टाला जा सके। दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल सचिवालय इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नज़र रख रहे हैं, जबकि स्थानीय नेता इस कार्रवाई के समय और तरीके पर सवाल उठा रहे हैं।







