Breaking
- Road Repair Alert: कोरबा में सड़कों की मरम्मत तेज करने के निर्देश, निर्माण का...
- Aromatic Rice Farming: सुगंधित धान की खेती से शंकर प्रसाद को मिलेंगे 45 हजार ...
- Sports News: Asian Games 2026 के पदकवीरों से PM मोदी ने की मुलाकात, महिला खिल...
- Raipur News: हल्दी बीज वितरण में अनियमितता, कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने दिए...
- बाढ़ से बर्बाद किसान सड़क पर उतरे, कलेक्ट्रेट का घेराव कर दी ट्रैक्टरों से जग...
- VB-G RAM G के तकनीकी सहायकों की राज्य स्तरीय हड़ताल, नियमितीकरण की मांग को ले...
- Raigarh News: किसानों की खुशहाली और समृद्धि हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकत...
- Dantewada News: नक्सलवाद से मिले घावों पर मरहम लगाकर हर पीड़ित को सम्मानपूर्ण...
- Narayanpur News: वनांचल में उम्मीदों का जल, नारायणपुर के दूरस्थ गांव बागझर मे...
- Raipur News: गन्ना मूल्य में छत्तीसगढ़ देश में नंबर वन, किसानों को अब 425 रुपय...
भारत का अमेरिका को दो-टूक 'फाइनल ऑफर': रूसी तेल पर पेनल्टी खत्म करो और टैरिफ घटाकर 15% लाओ...

भारत और अमेरिका के बीच जारी व्यापार युद्ध (Trade War) को खत्म करने के लिए नई दिल्ली ने अपना संशोधित और अंतिम प्रस्ताव वाशिंगटन को सौंप दिया है। इस प्रस्ताव में भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता नहीं करेगा। भारत की मुख्य मांग है कि भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50% के भारी-भरकम टैरिफ को घटाकर 15% के स्तर पर लाया जाए। भारत ने साफ किया है कि वर्तमान दरें भारतीय निर्यातकों के मुनाफे को पूरी तरह खत्म कर रही हैं।

वर्तमान में अमेरिका भारतीय सामानों पर कुल 50% शुल्क वसूल रहा है। इसमें 25% 'रेसिप्रोकल टैरिफ' और 25% अतिरिक्त 'पेनाल्टी' शामिल है, जो अमेरिका ने भारत द्वारा रूसी कच्चा तेल खरीदे जाने के विरोध में लगाई है। भारत ने अपने फाइनल ऑफर में इस 25% पेनल्टी को तुरंत और पूरी तरह से खत्म करने की शर्त रखी है। भारतीय वार्ताकारों का तर्क है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा उसकी अपनी प्राथमिकता है और इसे व्यापारिक दंड का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
इस रियायत के बदले में भारत ने भी अमेरिका के लिए अपने दरवाजे खोलने का प्रस्ताव दिया है। भारत अखरोट, बादाम, सेब और कुछ विशिष्ट औद्योगिक उत्पादों पर से आयात शुल्क 'तुरंत' हटाने के लिए तैयार हो गया है। हालांकि, यह रियायत तभी लागू होगी जब अमेरिका रूसी तेल से जुड़ी पेनाल्टी को हटाएगा। इसके साथ ही, भारत ने कुछ संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी और कृषि के कुछ हिस्सों को पूरी तरह खोलने से इनकार कर दिया है, जिसे भारत की 'रेड लाइन' माना जा रहा है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की टीम ने भारत के इस प्रस्ताव को अब तक का 'सबसे बेहतरीन ऑफर' बताया है, लेकिन पेंच अभी भी रूसी तेल पर फंसा हुआ है। भारतीय निर्यातकों ने सरकार को फीडबैक दिया है कि वे 25% तक का शुल्क तो झेल सकते हैं, लेकिन 50% के साथ अमेरिकी बाजार में टिके रहना असंभव है। भारत अब अमेरिका के जवाब का इंतजार कर रहा है और संकेत दिए हैं कि यदि यह समझौता नहीं होता है, तो भारत अन्य वैश्विक भागीदारों (जैसे ब्रिटेन और ओमान) के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को और तेजी से विस्तार देगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह डील फाइनल हो जाती है, तो यह 2025 की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत होगी। इससे न केवल भारतीय इंजीनियरिंग और कपड़ा उद्योग को संजीवनी मिलेगी, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों में आया तनाव भी कम होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी आसियान शिखर सम्मेलन (ASEAN Summit) के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच होने वाली मुलाकात में इस पर अंतिम मुहर लग सकती है।







