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सात फेरे हुए पूरे, पर सुबह होते ही बदल गई कहानी: दूल्हा निकला नाबालिग, प्रशासन ने निरस्त की शादी

बालोद जिले से एक दिलचस्प और सबक सिखाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक युवक और युवती के विवाह के सात फेरे तो पूरे हो गए, लेकिन अगली सुबह होते ही दांपत्य जीवन की शुरुआत से पहले ही कहानी बदल गई। विवाह के बाद यह खुलासा हुआ कि दूल्हा कानूनी रूप से विवाह योग्य उम्र (21 वर्ष) से 2 महीने छोटा है। जानकारी मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और तुरंत कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए इस विवाह को निरस्त कर दिया।

घटना के अनुसार, विवाह बड़े धूमधाम से संपन्न हुआ था, लेकिन किसी ने दूल्हे की उम्र की बारीकी से जांच नहीं की थी। शादी के अगले दिन जब मामले की भनक स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग तक पहुँची, तो अधिकारियों ने तुरंत संज्ञान लिया। चूंकि प्रशासन ने बालोद को 'बाल विवाह मुक्त' बनाने का लक्ष्य रखा है, इसलिए इस तरह के मामलों में शून्य सहनशीलता (zero tolerance) की नीति अपनाई जा रही है। जांच में उम्र की पुष्टि होने के बाद, प्रशासन ने दोनों पक्षों को तलब किया और कानूनी नियमों का हवाला देते हुए विवाह को अमान्य घोषित कर दिया।
प्रशासन की सख्ती और संदेश:
कानूनी उम्र का महत्व: प्रशासन ने साफ किया है कि विवाह के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष होना अनिवार्य है।
जागरूकता: इस घटना ने एक बार फिर समाज को जागरूक किया है कि शादी तय करने से पहले आयु प्रमाण-पत्र (जैसे आधार कार्ड या जन्म प्रमाण-पत्र) की ठीक से जांच करना कितना आवश्यक है।
बाल विवाह मुक्त बालोद: बालोद जिला 'बाल विवाह मुक्त' होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहाँ प्रशासन ऐसी किसी भी चूक को नजरअंदाज नहीं कर रहा है।
इस घटना के बाद इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है। जहाँ एक ओर लोग इस कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह उन परिवारों के लिए एक कड़ा संदेश है जो जल्दबाजी या लापरवाही में नाबालिगों का विवाह तय कर देते हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध बाल विवाह की सूचना तुरंत दें, ताकि भविष्य में इस तरह की सामाजिक और कानूनी दिक्कतों से बचा जा सके। फिलहाल, दोनों परिवारों को भविष्य में कानून का पालन करने की हिदायत देकर मामला शांत कराया गया है।







